मुझे बदनाम किया जा रहा: ममता के करीबी का फांसी पर लटका शव मिला; चुनाव हारने के बाद बागी गुट में शामिल हो गए थे
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पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी ममता के पुराने करीबियों में से एक थे। वे हाल ही में बागी गुट की बैठकों में शामिल हुए थे।
नेशनल डेस्क. पश्चिम बंगाल के पूर्व डिप्टी स्पीकर और TMC के दिग्गज नेता आशीष बनर्जी (75 साल) का रविवार को उनके आवास पर फांसी पर लटका हुआ शव मिला। पुलिस को शव के पास सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें लिखा था- भ्रष्टाचार में कभी भी शामिल न होने के बावजूद मुझे बदनाम किया गया।
पुलिस ने बताया- रामपुरहाट से 5 बार के विधायक और पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी का शव बीरभूम के रामपुरहाट में उनके आवास में बने पार्टी कार्यालय में मिला। कमरे से एक पेज का सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। इसमें लिखा था- मेरी मौत का कोई भी जिम्मेदार नहीं है।
इसमें आगे लिखा था- मुझे बदनाम करने की कोशिशों की मैं निंदा करता हूं। आज मुझे लगता है कि राजनीति में आना एक गलती थी। मैं अपनी आने वाली पीढ़ी को राजनीति में न आने की सलाह दूंगा। हालांकि, सुसाइड नोट में किसी का भी नाम नहीं लिखा है।
बागी गुट में शामिल हो गए थे आशीष बनर्जी
आशीष ममता के सबसे पुराने करीबियों में से थे। वे 2026 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद वे ऋतब्रत बनर्जी वाले बागी गुट की बैठकों में भी शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आशीष बनर्जी को ईमानदार और सज्जन नेता बताया और कहा कि उन्होंने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है कि क्या उन्हें TMC के भ्रष्ट नेताओं ने धमकी दी थी और ब्लैकमेल किया था।
आशीष बनर्जी रामपुरहाट कॉलेज से 2011 में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से रिटायर हुए थे। वे बच्चों को फ्री ट्यूशन और स्पेशल क्लासेस भी देते थे। उनकी मौत की खबर फैलते ही उनके घर के आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। इनमें TMC, BJP और CPM कार्यकर्ता भी शामिल थे।
आशीष बनर्जी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उन्होंने कभी लोगों की मदद के बदले एक रुपए यहां तक कि मिस्टी (बंगाल की मिठाई) तक नहीं ली। बनर्जी का शव जिस कमरे में मिला, उसका दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिस इसे सुसाइड मान रही है और जांच कर रही है कि कौन आशीष बनर्जी को परेशान कर रहा था।

