महाराष्ट्र में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी रद्द: विवाद के बीच CM फडणवीस ने हिंदी को तीसरी भाषा बनाने का आदेश किया रद्द
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों में थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े दोनों प्रस्तावों को रद्द कर दिया है। दरअसल, फडणवीस सरकार हाल ही में स्कूलों में हिंदी भाषा को तीसरी भाषा बनाने का प्रस्ताव लाई थी। विपक्षी दलों ने इसे 'हिंदी थोपना' बताया था और इसका विरोध कर रहे थे। ऐसे में अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रस्ताव को वापस ले लिया है।
भाषा को लेकर हो रहे विवाद के बीच फडणवीस सरकार ने रविवार को कैबिनेट बैठक बुलाई थी। बैठक के बाद CM फडणवीस ने कहा, 'हमने ये फैसला किया है कि शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी एक रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट के आधार पर ये तय किया जाएगा कि भाषा का स्तर क्या होना चाहिए, किस तरह पॉलिसी लागू की जा सकती है। छात्रों को किस तरह के ऑप्शन दिए जाएंगे। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर निर्णय लेगी। तब तक, दोनो सरकारी प्रस्ताव रद्द कर दिए गए है।'
सरकार ने दो प्रस्ताव किए थे जारी
दरअसल, फडणवीस सरकार ने 16 अप्रैल को एक आदेश जारी किया था, जिसमें कक्षा 1 से 5 तक अंग्रेजी और मराठी माध्यम के छात्रों के लिए हिंदी को अनिवार्य तीसरी भाषा बनाया गया था।
हालांकि, जब इसका विरोध हुआ तो 17 जून को नया आदेश जारी किया गया, जिसमें कहा गया- 1 से 5वीं क्लास के इंग्लिश मीडियम और मराठी मीडियम स्कूलों में हिंदी तीसरी भाषा होगी, लेकिन ये अनिवार्य नहीं है।
दूसरे आदेश के बाद भी नहीं थमा भाषा विवाद
फडणवीस सरकार द्वारा यूटर्न लेने के बावजूद हिंदी भाषा को लेकर विवाद नहीं थमा। शिवसेना (उद्धव गुट), राज ठाकरे की मनसे और एनसीपी (शरद पवार) ने इसका खुलकर विरोध किया। शिवसेना (उद्धव गुट) ने मुंबई समेत पूरे राज्य में सरकार के आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें हिंदी से आपत्ति नहीं है, बल्कि उसके थोपे जाने से है।
सीएम फडणवीस ने दी सफाई
महाराष्ट्र विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार (30 जून) से शुरू हो रहा है। इससे पहले रविवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भाषा विवाद को लेकर विपक्ष के सवालों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, त्रिभाषा नीति लागू होने के बाद भी सरकार का मुख्य फोकस मराठी भाषा पर ही रहेगा।
फडणवीस ने इस दौरान उद्धव ठाकरे पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, वह हिंदी का विरोध कर रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी स्वीकार करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। फडणवीस ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उद्धव ठाकरे ने डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की उस सिफारिश को स्वीकार किया था, जिसमें कक्षा 1 से 12 तक त्रिभाषा नीति लागू करने की बात कही गई थी और इस नीति को लागू करने के लिए एक समिति का गठन भी किया गया था।
देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'उस समय राज ठाकरे कहीं नजर नहीं आ रहे थे। उन्हें उद्धव से पूछना चाहिए कि विपक्ष में जाने पर उनका स्टैंड क्यों बदल गया? फडणवीस ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर चाहते थे कि सभी लोग हिंदी भाषा सीखें।

