आदित्य ठाकरे बोले- हमारे ऊपर कोई भी भाषा थोपी न जाए: कहा- अगर मराठी भाषा या महाराष्ट्र का अपमान हुआ, तो चीजें बिगड़ सकती हैं
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आदित्य ठाकरे बोले- हमारे ऊपर कोई भी भाषा थोपी न जाए
महाराष्ट्र में भाषा विवाद को लेकर जंग जारी है। शिवसेना UBT नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि वे मराठी या महाराष्ट्र का अपमान नहीं सहेंगे। अगर अपमान हुआ तो बात बिगड़ सकती है। आदित्य ने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों पर कोई भी भाषा थोपनी नहीं चाहिए।
हम कानून हाथ में लेने के हिमायती नहीं
आदित्य ठाकरे ने मीडिया से कहा, 'हम चाहते हैं कि हमारी मातृभाषा मराठी का अपमान न हो। साथ ही, हम यह भी चाहते हैं कि हमारे ऊपर कोई भी भाषा जबरदस्ती न थोपी जाए। हम नहीं चाहते कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में ले। लेकिन, अगर मराठी या महाराष्ट्र का किसी भी तरीके से अपमान हुआ तो माहौल बिगड़ सकता है।'
स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य करने पर हुआ था विवाद
16 अप्रैल 2025 को फडणवीस सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत राज्य के मराठी और इंग्लिश मीडियम के स्कूलों में क्लास 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य कर दिया गया था। आदेश के मुताबिक, स्कूलों में तीन भाषाएं पढ़ाई जानी थीं। पहली मराठी, दूसरी अंग्रेजी और तीसरी हिंदी।
इस फैसले के बाद शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विरोध के चलते सरकार ने 17 जून 2025 को संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें हिंदी को अनिवार्य की जगह वैकल्पिक बना दिया। हालांकि, इसके बाद भी विरोध कब नहीं हुआ। 29 जून को राज्य सरकार ने इस नीति को रद्द करते हुए आदेश पूरी तरह वापस ले लिया।

