महाराष्ट्र में मेडिकल डिवाइस के थोक रेट और MRP में बड़ा अंतर: IV सेट पर 2800% तक मार्जिन; तुकाराम मुंडे ने लिखा केंद्र को पत्र
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तुकाराम मुंडे के अनुसार, कानून में सख्ती नहीं होने से मरीजों से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क. महाराष्ट्र में FDA ने इलाज में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल डिवाइस के रेट पर बड़ा खुलासा किया है। यह सर्वे महाराष्ट्र स्टेट प्राइस मॉनिटरिंग रिसोर्स यूनिट (MSP MRU) ने किया है। अधिकारियों ने होलसेल और रिटेल में बेचे जाने वाली मेडिकल इक्विपमेंट के रेट पर बड़ा अंतर पाया।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में सामने आया कि IV (इंट्रावेनस) सेट थोक रेट 11 रुपए में मिला, जबकि बेड पर मौजूद मरीज को 325 रुपए में दिया गया। इसमें 2800% प्रोफिट मार्जिन हुआ।
खरीदी रेट और MRP में जमीन आसमान का अंतर
10 ml की सिरिंज की कॉस्ट 6.75 रुपए है, जबकि उसे 87.20 रुपए में करीब 747% मार्जिन पर मरीज को बेचा गया। IV कैनुला का थोक रेट 22.50 रुपए और उसे 424 रुपए में 99 गुना अधिक दाम पर बेचा गया। नेबुलाइजर मास्क का थोक रेट 40 रुपए जबकि उसे 715 रुपए में बेचा गया। इसमें 1687% मार्जिन मिला। सर्वे में कई मेडिकल डिवाइस में खरीदी रेट और प्रिंट MRP में भारी अंतर दिखा।

29 गुना तक अधिक रेट
टीम ने IV सेट, सिरिंज, नेबुलाइजर ऑक्सीजन मास्क और अन्य उपकरणों की जांच की और पाया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमत, उन्हें खरीदने की लागत से 29 गुना तक अधिक थी। महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने मेडिकल डिवाइस के रेट को तर्कहीन और अनुचित बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से सर्जिकल डिवाइस के रेट पर विचार करने के लिए कहा है।
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कानून में सख्ती की जरुरत
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के सेक्रेटरी को लिखे पत्र में कहा- शुरुआत रेट (थोक रेट) में मैन्युफैक्चरर के खर्चे, जैसे प्रोडक्शन, प्रोडक्ट की डेवलपमेंट, मार्केटिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और प्रोफिट मार्जिन जुड़े होते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज को इन डिवाइस की सख्त जरुरत होती है। इलाज के दौरान IPD में भर्ती मरीज को मोलभाव की गुंजाइश नहीं रहती है। DPCO 2013 के तहत कानून में सख्ती नहीं होने की वजह से प्राइस में बेरोकटोक मुनाफाखोरी होती है, जिससे जनता पर अनावश्यक, भारी और अनुचित वित्तीय बोझ पड़ता है।

