मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई: CJP प्रोटेस्ट में शामिल स्टूडेंट को नोटिस भेजने पर CJI की फटकार, बोले- सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन क्यों किया
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी पांच राज्यों में दर्ज FIR को रद्द कर दी थी। साथ ही दूसरे राज्यों में भी ऐसे मामलों को आगे न बढ़ाने का निर्देश दिया था।
नेशनल डेस्क। ग्रेटर नोएडा में एक स्टूडेंट को CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करने के आरोप में नोटिस भेजना प्रशासन को भारी पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (9 सितंबर) को इस मामले पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने साफ कहा कि जब पहले ही स्टूडेंट्स के खिलाफ किसी भी तरह का एक्शन न लेने का आदेश दिया जा चुका है, तो फिर मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया?
यह मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर के एक स्टूडेंट से जुड़ा है। बुधवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच के सामने इस मामले को उठाया गया।
‘मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई नोटिस जारी करने की’
स्टूडेंट के खिलाफ नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। इसमें स्टूडेंट से पूछा गया था कि शांति बनाए रखने के लिए उसे 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड और इतनी ही रकम की दो जमानतें देने के लिए क्यों न कहा जाए।
मामला सामने आते ही CJI ने कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने कहा- मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई नोटिस जारी करने की? हमने साफ कहा था कि किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। कोई मजिस्ट्रेट SC के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्टूडेंट्स को दे चुका है राहत
CJP के नेतृत्व में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही छात्रों को बड़ी राहत दे चुका है। कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज FIR को रद्द कर दिया था और छात्रों के खिलाफ किसी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
ऐसे में वकील ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद एक स्टूडेंट को नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नोएडा और उत्तर प्रदेश के अधिकारी छात्रों के बीच डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रेस में खबर आने के बाद नोटिस वापस
वकील ने कोर्ट को बताया कि मामला मीडिया में आने के बाद अधिकारियों ने नोटिस वापस ले लिया। हालांकि, वकील ने इस कार्रवाई को पहली नजर में कोर्ट की अवमानना का मामला बताते हुए इस पर एक्शन लेने की मांग की।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील से कहा कि नोटिस को याचिका के जरिए रिकॉर्ड पर लाया जाए। बेंच ने संकेत दिया कि वह संबंधित अधिकारी से इस पूरे मामले में जवाब मांगेगी।
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