LPU हिंसा में 20 आरोपियों की पहचान हुई, 9 गिरफ्तार: वायरल मैसेज से शुरू हुआ था बवाल, अब पुलिस पोस्ट की सच्चाई और सोर्स खोजने में लगी
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LPU हिंसा की जांच अब दो हिस्सों में आगे बढ़ रही है- एक तरफ हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ उस वायरल मैसेज की सच्चाई और उसके सोर्स की जांच हो रही है, जिसने पूरे विवाद को भड़का दिया था।
नेशनल डेस्क। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 27 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 7 यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हैं, जबकि 2 बाहरी हैं। इन्हें फगवाड़ा, जम्मू और मुंबई से पकड़ा गया है। ये वे लोग हैं, जो तोड़फोड़ और लूटपाट करते हुए कैमरों में कैद हुए थे।
पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 20 लोगों की पहचान कर उन्हें आरोपी बनाया है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस के मुताबिक, यह पूरा विवाद एक वायरल सोशल मीडिया मैसेज के बाद शुरू हुआ था, जिसमें गर्ल्स हॉस्टल में एक स्टूडेंट के साथ यौन उत्पीड़न का दावा किया गया था।
मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वायरल मैसेज कहां से शुरू हुआ और क्या इसके पीछे किसी तरह की साजिश थी।
वायरल मैसेज के बाद कैंपस में जुटे स्टूडेंट
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट तेजी से वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल में एक बाहरी व्यक्ति ने एक स्टूडेंट के साथ यौन उत्पीड़न किया है।
मैसेज फैलने के बाद बड़ी संख्या में स्टूडेंट कैंपस में जुट गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने की मांग की जाने लगी। देखते ही देखते प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।
पुलिस बोली- हमने पहले लाठीचार्ज नहीं किया
पुलिस के DIG नवीन सिंगला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पहले से लाठीचार्ज नहीं किया था। उनके मुताबिक, पुलिस शुरू में स्टूडेंट और मीडिया के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रही थी, जिससे भरोसा दिलाया जा सके कि प्रशासन उनके साथ है।
DIG ने बताया कि जब पुलिस की टीमें कैंपस पहुंचीं, तब शुरुआती स्थिति में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। इसके बाद भीड़ के एक हिस्से ने अचानक पुलिस और मीडिया पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद कैंपस में तोड़फोड़ हुई और कई गाड़ियों में आग लगा दी गई। पुलिस का कहना है कि हिंसक भीड़ को हटाने और हालात काबू में करने के लिए उसे हल्के बल के तौर पर लाठीचार्ज का इस्तेमाल करना पड़ा। तीन तस्वीरें...



हाईवे तक पहुंच गई थी हिंसा
हिंसा सिर्फ यूनिवर्सिटी कैंपस तक सीमित नहीं रही। तोड़फोड़ और झड़पों का असर नई दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे तक पहुंच गया था। हालात बिगड़ने के बाद यूनिवर्सिटी ने 10 दिनों के लिए क्लास बंद कर दीं। मिड-टर्म एग्जाम भी टाल दी गईं।
लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने अफवाहों और हिंसा को और फैलने से रोकने के लिए कैंपस के आसपास कुछ वक्त के लिए इंटरनेट सेवा भी बंद की थी।
यौन उत्पीड़न के दावे की भी अलग जांच
पूरे विवाद की शुरुआत जिस यौन उत्पीड़न के दावे से हुई, पुलिस अब उसकी भी जांच कर रही है। DIG सिंगला ने कहा कि इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अलग SIT बनाई गई है और जांच की जा रही है।
पुलिस वायरल पोस्ट के सोर्स का भी पता लगा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, यह भी जांच का हिस्सा है कि सोशल मीडिया पर मैसेज किसने फैलाया और क्या इसके पीछे कोई बाहरी, राजनीतिक या सीमा पार कनेक्शन था।
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