कैश कांड में फंसे जस्टिस वर्मा को हटाने का प्रस्ताव स्वीकार: लोकसभा स्पीकर बोले- करप्शन पर जीरो टॉलरेंस; 3 मेंबर्स की कमेटी बनाई
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हाईकोर्ट के जज जस्टिस वर्मा के घर जले हुए नोटों के बंडल मिले थे।
कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में स्वीकार हो गया है। लोकसभा स्पीकर ने जस्टिव वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी का गठन कर दिया है। उन्होंने कहा, ये केस गंभीर है। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी वी आचार्या को शामिल किया गया है।
जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर इस साल मार्च में आग लग गई थी। इसके बाद फायर फाइटर्स ने जब आग बुझाई तो उनके घर से जले हुए और आधे जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। 21 मार्च को तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना ने इस मामले में जस्टिस वर्मा का लिखित जवाब मांगा था। जस्टिस वर्मा ने अगले दिन दिए जवाब में आरोपों को गलत बताया था।
सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस वर्मा को नहीं मिली राहत
इसके बाद चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट और घर में मिले नोटों के बंडल का वीडियो अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती दी थी। इस रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था।
तत्कालीन CJI ने दी थी रिपोर्ट
पिछले महीने तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने कमेटी की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जजों को हटाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
जानिए हाईकोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया
हाईकोर्ट के जज को हटाने और उस पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के आर्टिकल 124 (4) में दी गई है। जज जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरुरी है। प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत करने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाते हैं। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कमेटी बना दी है।
कमेटी में CJI, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद होते हैं। यह कमेटी ही आरोप तय करती है। अगर जज दोषी होते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है। महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। दोनों सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

