ISS मिशन पर लोकसभा में चर्चा: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- ऑपरेशन सिंदूर में भी अंतरिक्ष टेक्नलॉजी की भूमिका; विपक्ष ने नारेबाजी की
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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को शुभांशु शुक्ला के ISS मिशन के बारे में लोकसभा में जानकारी दी।
लोकसभा में ISS मिशन और गगनवीर शुभांंशु शुक्ला की उपलब्धियों पर चर्चा हुई। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। स्पीकर ने कहा कि देश- दुनिया में सकारात्मक संदेश जाएगा। अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने शुभांशु शुक्ला के ISS मिशन के बारे में लोकसभा जानकारी दी।
विपक्ष के हंगामे के बीच डॉ. जितेंद्र की स्पीच
इस दौरान विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की। हंगामे के बीच जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष को अंतरिक्ष यात्रा से भी नाराजगी है। उन्होंने कहा ऑपरेशन सिंदूर में भी अंतरिक्ष टेक्नलॉजी की भूमिका रही है। 60-70 साल तक अंतिरक्ष विभाग अलग-थलग पड़ा रहा। मोदी सरकार के बाद अंतरिक्ष में नए अध्याय का आरंभ हुआ। इस मिशन ने गति पकड़ी। हमारे देश में प्रतिभा की कमी नहीं थी, आंखों में सपने भी थे। तो कमी था अनुकूलता का।
विपक्ष साइंटिस्ट को बधाई देने में विफल रहा-डॉ. जितेंद्र
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष हमारी अंतरिक्ष उपलब्धियों के लिए अंतरिक्ष विशेषज्ञों और साइंटिस्ट को बधाई देने में विफल रही हैं। आपका गुस्सा सरकार से हो सकता है। आपकी नाराजगी BJP और NDA से हो सकती है लेकिन हैरत है कि आपकी नाराजगी एक एस्ट्रोनॉट के साथ भी हो सकती है। वह अंतरिक्ष यात्री के साथ साथ इंडियन एयरफोर्स के एक अनुशासित सिपाही भी है। वह किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं है। आप धरती से नाराज हैं, आप आकाश से नाराज हैं और आज आप अंतरिक्ष से भी नाराज दिखते हैं।
शुभांशु शुक्ला सोमवार PM आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
स्पेस स्टेशन से दिया आखिरी संदेश
शुभांशु शुक्ला ने स्पेस स्टेशन से अपना आखिरी संदेश में कहा था कि भारत अंतरिक्ष से कैसा नजर आ रहा है। शुक्ला ने कहा- आज अंतरिक्ष से भारत महत्वाकांक्षी, निडर और आत्मविश्वास और गर्व भरा नजर आ रहा है। भारत आज भी सारे जहां से अच्छा नजर आ रहा है। अंतरिक्ष को खंगालने का हमारा यह सफर लंबा और कठिन हो सकता है, लेकिन यह शुरू हो चुका है।
एस्ट्रोनॉट्स ने 18 दिन में किए 60 प्रयोग
स्पेस स्टेशन पर 18 दिन रहने के दौरान एस्ट्रोनॉट्स ने कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए। 31 देशों की गतिविधियों को रिप्रेजेंट किया। इसके साथ ही यह ऐसा मिशन बन गया जिसमें सबसे ज्यादा देशों की भागीदारी रही। कई एक्सपेरिमेंट इंडियन बायोटेक्नोलॉजी किट के इस्तेमाल को लेकर भी किए गए। साथ ही लाइफ साइंस, स्पेस फार्मिंग और मेडिकल रिसर्च से जुड़े प्रयोग भी किए गए। इस मिशन को पूरा करने के साथ ही कैप्टन शुभांशु शुक्ला प्राइवेट स्पेसफ्लाइट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन विजिट करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। इसरो 2040 में गगनयान मिशन में शुभांशु शुक्ला के अनुभव का इस्तेमाल करेगा। यह मिशन भारत के लिए बेहद अहम है। भारत सरकार ने इस मिशन में करीब 33 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस दौरान एक्सिओम मिशन के रिसचर्स ने धरती की निचली कक्षा में शोध किए।
कौन हैं कैप्टन शुभांशु शुक्ला
39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला एक ट्रेंड फाइटर पायलट हैं। वह इंडियन एयरफोर्स में लंबे समय से सेवा दे रहे हैं। ISRO ने उन्हें इस मिशन के लिए प्राइमरी कैंडिडेट चुना था। मिशन से पहले वह एक महीने से ‘क्वारनटीन प्रोटोकॉल’ में थे। स्पेस मिशन से पहले उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे, इसलिए उन्हें क्वारनटीन प्रोटोकाॅल में रखा गया था। कैप्टन शुक्ला को गगनयान (Gaganyaan) मिशन के लिए भी ट्रेन किया गया है।

