लक्षद्वीप में आइलैंड पर बनेगा INS बिट्रा: तीसरा नेवल बेस; ट्रैड रूट समेत अरेबियन सी में सुरक्षा बढ़ेगी
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बिट्रा सबसे छोटा बसा हुआ आईलैंड है। यह सिर्फ 271 लोग रहते थे। (फाइल फोटो)
नेशनल डेस्क. लक्षद्वीप के बिट्रा आइलैंड पर INS बिट्रा बनाने की तैयारी है। इससे नोर्दन लक्षद्वीप में निगरानी और ऑपरेशनल पहुंच बढ़ेगी और समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी। कवरत्ती में INS द्वीपरक्षक और मिनिकॉय में INS जटायु के बाद यह इंडियन नेवी का लक्षद्वीप आईलैंड में अपना तीसरा नेवी बेस होगा।
लक्षद्वीप प्रशासन ने बिट्रा को अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। यह 36 आईलैंड की चैन में से एक है। साथ ही इसका डिफेंस और स्ट्रैटजिक इस्तेमाल किया जा सकेगा। जिससे हिंद महासागर में इंडियन नेवी की पकड़ और मजबूत होगी।
2025 में प्रशासन ने नोटिफिकेशन जारी किया
इसको लेकर रिवेन्यू डिपार्टमेंट ने 11 जुलाई 2025 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें मुआवजा और जमीन को ट्रांसफर करने के लिए ट्रांसपेरेंसी जुड़ी चीजें शामिल हैं। इसका घोषित मकसद बिट्रा आईलैंड को डिफेंस और स्ट्रैजिक एजेंसियों को पूरी तरह से सौंपना है, जिसका कारण इसकी रणनीतिक स्थिति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहमियत बताई गई है।

आईलैंड पर 271 लोग रहते हैं
इंडिया टुडे की की रिपोर्ट के मुताबिक, लक्षद्वीप की ग्राउंड सिचुएशन काफी अलग है। यहां हवाई और सी कनेक्टिविटी के कारण डेवलपमेंट वर्क बहुत धीमें हैं। बिट्रा सबसे छोटा बसा हुआ आईलैंड है। यह सिर्फ 0.105 वर्ग km में फैला है 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां कुल 271 लोग रहते थे। यह आईलैंड नोर्दन लक्षद्वीप में स्थित है, इसके डेवलप होने से कवरत्ती और अगत्ती के बीच एक सर्विलांस गैप खत्म होगा।
कहां स्थित है बिट्रा आईलैंड
साउथ में मिनिकॉय 8 डिग्री और 9 डिग्री' चैनल पर नजर रखता है। ये चैनल मलक्का स्ट्रैट को गल्फ ऑफ अदन और होर्मुज स्ट्रैट से जोड़ने वाले अहम ट्रैड रूट पर है। वहीं, बिट्रा नेवी को एक नोर्दन ठिकाना दे सकता है, जिससे जरूरी समुद्री रास्तों पर नजर रखी जा सके। साथ ही समुद्री डकैती और नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटा जा सके, और अरब सागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सके।
अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो बिट्रा INS द्वीप रक्षक और INS जटायु (जिसे 6 मार्च, 2024 को कमीशन किया गया था) के बाद तीसरा डिफेंस बेस बन जाएगा।
डिफेंस सूत्रों का कहना है कि इस बेस की जरूरत नोर्थ लक्षद्वीप में निगरानी की कमियों को दूर करने और ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाने के लिए है। साथ ही केंद्र के डुअल-यूज मॉडल के तहत इससे नौकरियां, मेडिकल और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर भी मिलेगा। जैसा कि अगाती एयरफील्ड के प्रस्तावित विस्तार और INS जटायु के साथ जुड़े मिनिकॉय के नए एयरफील्ड के मामले में देखा गया है।
PM मोदी के दौरे के बाद आया लाइमलाइट में
जनवरी 2024 में PM मोदी के दौरे के बाद लक्षद्वीप टूरिज्म के नक्शे पर आया था। अब उसके दो साल बाद यह कोरल पैराडाइज तेजी से भारत का पश्चिमी सिक्योरिटी ग्रिड बनता जा रहा है।

