लद्दाख को मिली हाईकोर्ट बेंच: मोदी कैबिनेट से मंजूरी; अमित शाह बोले- दूर-दराज के लोगों को आसानी से न्याय मिलेगा
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2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख एक केंद्र शासित प्रदेश बना है, हालांकि लद्दाख का हाईकोर्ट जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही रहा।
नेशनल डेस्क। लद्दाख के लोगों को अब हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए जम्मू या श्रीनगर तक लंबा सफर नहीं करना पड़ेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की नई बेंच स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना था, लेकिन इसके बाद भी लद्दाख के लिए अलग हाईकोर्ट नहीं बना और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कॉमन हाईकोर्ट ही बना रहा।
लद्दाख में बनेगी हाईकोर्ट की नई बेंच
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा- केंद्रीय कैबिनेट ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का फैसला लिया है। इस कदम से लद्दाख के दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को जल्द न्याय मिल सकेगा। सरकार लद्दाख के सर्वांगीण विकास और केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमिटेड है।

अभी जम्मू-श्रीनगर जाना पड़ता है
लद्दाख में हाईकोर्ट की बेंच नहीं होने के कारण यहां के लोगों को हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए जम्मू या श्रीनगर जाना पड़ता है। लद्दाख से जम्मू या श्रीनगर आने तक का सफर दूरी की वजह से आसान नहीं होता। नई बेंच बनने के बाद लद्दाख के लोगों, वकीलों और मुकदमों से जुड़े दूसरी पार्टियों को हाईकोर्ट की सर्विसेज नजदीक मिल सकेंगी। इससे केस लड़ने में लगने वाला समय और ट्रैवल भी कम होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट में 44 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग
The Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जुलाई 2026 तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में कुल 44,557 केस पेंडिंग थे। इनमें 6,106 मामले ऐसे थे, जो 10 साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। लद्दाख में नई बेंच बनने से वहां से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आने और पेंडिंग केस का बोझ कम होने की उम्मीद है।
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लद्दाख के LG ने बताया ऐतिहासिक फैसला
लद्दाख के उपराज्यपाल ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा- लद्दाख में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना न सिर्फ तेजी से न्याय सुनिश्चित करेगी, बल्कि यह क्षेत्र के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराती है।
अप्रैल में बनाए गए थे 5 नए जिले
हाईकोर्ट बेंच का फैसला लद्दाख में हाल के महीनों में हुए बड़े एडमिनिस्ट्रेटिव बदलावों के बाद आया है। अप्रैल 2026 में लद्दाख में पांच नए जिले बनाए गए थे। इनमें नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। इससे लद्दाख में जिलों की संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है।
2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग हुआ था लद्दाख
लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में आर्टिकल 370 हटाने के साथ तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बना। हालांकि दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट कॉमन रहा।
लद्दाख में अभी एक लोकसभा सीट है। क्षेत्र से लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग दो लोकसभा सीटों की मांग भी उठती रही है। ऐसे में हाईकोर्ट की बेंच को लद्दाख के लिए एक और अहम इंस्टीट्यूशनल बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

