ममता सरकार ने नहीं माना चुनाव आयोग का आदेश: EC ने फर्जी वोट मामले में 5 अधिकारियों को सस्पेंड और FIR के आदेश दिए थे; राज्य सरकार ने 2 को सिर्फ चुनावी ड्यूटी से हटाया
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ममता बनर्जी ने कहा, वे निलंबन आदेश का पालन नहीं करेंगी और हर कीमत पर राज्य सरकार के कर्मचारियों की रक्षा करेंगी।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मामले में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को 5 अधिकारियों को सस्पेंड करने और उनके खिलाफ FIR करने का आदेश दिया था। ममता सरकार ने सोमवार को इसके जवाब में चुनाव आयोग को बताया कि दो अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटा दिया गया है।
राज्य सरकार ने न तो इन अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया और न ही इनके खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया। चुनाव आयोग ने जिन 5 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा था, उनमें से दो पश्चिम बंगाल सिविल सर्विस से जुड़े अधिकारी हैं, दो असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर, जबकि एक डाटा एंट्री ऑपरेटर है। ममता सरकार की ओर से कहा गया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ जांच से पहले कार्रवाई करना, कठोर कदम होगा।
चुनाव आयोग ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड करने का दिया था निर्देश
चुनाव आयोग ने 5 अगस्त को बरूईपुर पुरबा और मोयना विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 127 वोटरों के फर्जी वोट बनवाने के मामले में 5 अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया था। ECI को लिखे पत्र में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज पंत ने कहा, पहले कदम के तौर पर 206-मोयना विधानसभा क्षेत्र के तामलुक ब्लॉक और एईआरओ के पीएएओ सुदीप्त दास और 137 बरुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के डाटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलदर को वोटर रिवीजन और चुनाव संबंधी कार्यों से हटा दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
जांच से पहले कार्रवाई करना गलत- बंगाल सरकार
अधिकारियों का बचाव करते हुए बंगाल के मुख्य सचिव ने पंत ने कहा, लगातार ईमानदारी और अपनी योग्यता का प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच से पहले कार्रवाई करना एक कठोर कदम होगा। इस तरह की कार्रवाई से न सिर्फ इन अधिकारियों बल्कि चुनाव ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगे अधिकारियों के मनोबल पर भी प्रभाव डालेगी।
एक दिन पहले ममता ने दिए थे एक्शन न लेने के संकेत
मुख्य सचिव का ये पत्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान के बाद भेजा गया, जिसमें सीएम ने खुले तौर पर कहा था कि वे निलंबन आदेश का पालन नहीं करेंगी और हर कीमत पर राज्य सरकार के कर्मचारियों की रक्षा करेंगी।

