IIT खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी सुसाइड केस: 'कुछ तो गलत है', सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट सुसाइड केस में मांगा जवाब
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सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
सुप्रीम कोर्ट ने IIT खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी में सुसाइड के मामलों पर स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा, कुछ तो गलत है। कोर्ट ने सुसाइड के इन केस में IIT खड़गपुर और शारदा यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है कि क्या ये मामले पुलिस के संज्ञान में तुरंत लाए गए थे?
पिछले हफ्ते शारदा यूनिवर्सिटी की 24 साल की डेंटल सर्जरी की एक स्टूडेंट ने हॉस्टल में सुसाइड कर लिया था। स्टूडेंट के रूम से मिले सुसाइड नोट में दो टीचर महेंद्र और शैरी के नाम लिखे थे। उसने दोनों शिक्षकों पर मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं, IIT खड़गपुर में बीटेक के छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। इस पर कोर्ट ने कहा, आईआईटी खड़गपुर में ऐसा क्या हो रहा है कि 7 महीने में 4 छात्रों ने अपनी जान दे दी।
'कोर्ट ने अपर्णा भट्ट को अमेकस क्यूरी नियुक्त किया'
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट को अमेकस क्यूरी नियुक्त करते हुए दोनों मामलों में जानकारी जुटाने के लिए कहा है। साथ ही यह भी बताने को कहा कि कॉलेज प्रशासन ने FIR दर्ज कब करवाई? क्या अधिकारियों ने पुलिस को बताने में मुस्तैदी दिखाई?
दोनों मामलों में स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा, 'इन दोनों मामलों में अगर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती या देरी होती है और कुछ नहीं किया जाता, तो तैयार रहें। हम अवमानना की कार्यवाही शुरू करेंगे और उन्हें सिविल जेल भेजने का निर्देश देंगे।'
आत्महत्या के केस में FIR अनिवार्य
इस पर IIT खड़गपुर के वकील ने बताया कि उन्होंने तत्परता से कार्रवाई की। IIT खड़गपुर पिछली आत्महत्याओं के मामलों को लेकर अदालत की जांच के दायरे में रहा है। 24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हर आत्महत्या के लिए एफआईआर करना अनिवार्य कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया था। टास्क फोर्स से छात्रों की आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। इस समिति ने अभी तक रिपोर्ट नहीं दी है।

