केरलम में आवारा कुत्तों से बच्चों की हिफाजत करेंगे टीचर: एंट्रेंस गेट पर नाम-नंबर लिखा जाएगा; डॉग देखते ही स्थानीय प्रशासन को सूचना देंगे
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नेशनल डेस्क. केरलम में बच्चों को आवारा कुत्तों के आतंक से बचाने के लिए टीचर्स की ड्यूटी लगाई जाएगी। राज्य के जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने टीचर्स को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, ताकि स्कूलों में आवारा कुत्तों के खतरे से बच्चों की सुरक्षा की जा सके। यह कदम स्कूलों में बच्चों को कुत्तों के काटने की बढ़ती शिकायतों के बाद उठाया गया।
क्यों उठाया गया फैसला
दरअसल, इडुक्की के राजपुरम और वायनाड के पनामराम समेत कई इलाकों में आवारा कुत्तों की वजह से स्टूडेंट को दिक्कतों की खबरें सामने आई थीं। इसके अलावा थलस्सेरी के तालिपारम्बा में स्टूडेंट्स ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को लेटर लिख आवारा कुत्तों के मामले में एक्शन लेने की मांग की थी।
टीचर्स की क्या ड्यूटी
डिपार्टमेंट ने कहा- मिल रहीं शिकायतों को देखते हुए आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए स्थानीय प्रशासन की मदद से ये पहल शुरू की गई है। नए नियमों के मुताबिक, टीचर्स को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इनके नाम और नंबर स्कूल गेट पर लगाए जाएंगे।
आदेश के मुताबिक, अगर सरकारी या प्राइवेट स्कूल के बाहर या परिसर में कुत्ते दिखाई देते हैं तो नोडल अधिकारी को तुरंत स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी होगी। प्रशासन से उम्मीद है कि वे कुत्तों को पकड़ें, उन्हें वैक्सीन लगाएं, नसबंदी करें और उन्हें सेफ शेल्टर में बंद करें।

स्कूलों को क्या आदेश
आदेश में स्कूलों से कहा गया है कि वे परिसर की चारदीवारी और एंट्री गेट को तुरंत ठीक कराएं, ताकि आवारा कुत्ते स्कूल के अंदर न घुस पाएं। स्कूलों की रसोई और खाने के कचरे फेंकने वाली जगहों के पास अक्सर आवारा कुत्ते पाए जाते हैं। इसलिए स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे खाने का कचरा इन जगहों पर न फेंका जाए।
स्टूडेंट्स को दी जाएगी ट्रेनिंग
इसके अलावा स्टूडेंट्स को अवेयरनेस सेशन दिए जाएंगे, ताकि उन्हें ये पता हो कि वे कुत्तों के साथ कैसा व्यवहार करें। कुत्ते के काटने की स्थिति में कौन से कदम उठाएं।
टीचर्स यूनियन ने विरोध किया
उधर, केरलम स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने इस आदेश का विरोध जताया है। संगठन के महासचिव टीकेए शफी ने कहा- स्कूलों के गेट के बाहर टीचर्स के नाम और फोन लिखना, उन्हें अपमानित करने के बराबर है। उन्होंने संगठन की इस पुरानी मांग को भी दोहराया कि टीचर्स को नॉन टीचिंग ड्यूटी में नहीं लगाना चाहिए।

