घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी: इनके नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल भी शेयर की गईं; CM अब्दुल्ला बोले- धमकियों को हल्के में न लें, कार्रवाई करें
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जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी देने वालों की पहचान कर कार्रवाई करनी चाहिए।
नेशनल डेस्क. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों पर चिंता जताई है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि इन धमकियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के साथ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उमर अब्दुल्ला ने घाटी में टारगेट किलिंग की पिछली घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा- अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग हुई हैं। कई कर्मचारी घाटी छोड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें उनके कैंपों के अंदर बंद कर दिया गया। इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके पीछे जो लोग हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या है मामला
दरअसल, जम्मू कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों ने 31 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों का नाम पूछकर उनकी हत्या कर दी थी। ये मजदूर ईंट भट्ठे पर काम करते थे। इसके दो हफ्तों बाद एक धमकी भरा लेटर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। इसमें कश्मीर घाटी में काम करने वाले कश्मीरी पंडितों को अपना रास्ता बदलने की चेतावनी दी गई।
दावा है कि यह लेटर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल की ओर से जारी किया गया है। इस धमकी भरे लेटर में कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और कॉन्टैक्ट डिटेल भी दिए गए थे। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल जुलाई में पहली बार चर्चा में आया था, ग्रुप ने बुरहान वानी का पोस्टर जारी किया था।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा गया
लेटर सामने आने के बाद पिछले हफ्ते सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त तक प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया। उनसे सतर्क और सुरक्षित स्थान पर रहने के लिए कहा गया है। इतना ही नहीं लेटर में जिन कर्मचारियों के नाम थे, उन्हें सुरक्षित तरीके से जम्मू शिफ्ट किया गया है।
पुलिस ने काम पर नहीं जाने की सलाह दी
कश्मीरी पंडित कर्मचारी अमित कौल ने बताया कि धमकियों के बाद पुलिस ने कर्मचारियों को काम पर नहीं जाने की सलाह दी है। घाटी में अभी भी रह रहे कर्मचारियों से घरों से बाहर नहीं निकलने को कहा गया है। पुलिस का कहना है कि धमकियों की जांच की जा रही है और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, यह एहतियाती कदम है और धमकी के सोर्स का पता लगाने की कोशिश जारी है।
PM पैकेज के तहत 6000 कश्मीरी पंडितों को मिली नौकरी
कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास के लिए 2010 में प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज शुरू किया गया था। इसके तहत करीब 6000 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। 1990 में आतंकवाद बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। रोजगार पैकेज का उद्देश्य विस्थापित कश्मीरी पंडित परिवारों की घाटी में वापसी को बढ़ावा देना था।
2022 में 5 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की हुई थी हत्या
साल 2022 में आतंकियों ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाकर कई हमले किए थे। इन हमलों में पांच कर्मचारियों की मौत हुई थी। इसके बाद PM पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों ने बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किया और उन्हें जम्मू ट्रांसफर करने की मांग की थी।
सरकार ने कर्मचारियों को जम्मू में तैनाती देने की मांग ठुकरा दी थी। हालांकि, इन कर्मचारियों को श्रीनगर और घाटी के दूसरे ऐसे शहरों में शिफ्ट किया गया था, जहां खतरा कम था।

