PM बोले- कर्तव्य भवन बनने से सरकार के 1500 करोड़ बचेंगे: ये पैसे सालाना रेंट में जाते थे, पुरानी बिल्डिंग्स में न लाइट अच्छी न वेंटिलेशन
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PM मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में कर्तव्य भवन बिल्डिंग का उद्घाटन किया।
PM मोदी ने बुधवार को कहा कि कर्तव्य भवन के निर्माण से सरकार के हजारों करोड़ रुपए बच जाएंगे। PM का कहना है कि दिल्ली के अलग-अलग जगहों पर कई मंत्रालयों के दफ्तर किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं। सरकार सालाना इन पर 1500 करोड़ रुपए खर्च करती है। अब कर्तव्य भवन के बनने से सरकार का आर्थिक बोझ थोड़ा कम हो जाएगा।
बता दें, PM मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में कर्तव्य भवन बिल्डिंग का उद्घाटन किया। यह केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है।। इसे बनाने का उद्देश्य सरकार के कई मंत्रालयों और विभागों को एक छत के नीचे लाकर कामकाज को आसान और आधुनिक बनाना है।
अंग्रेजों के जमाने में बनी इमारतों से छुटकारा मिलेगा
कर्तव्य भवन-3 के उद्धाटन समारोह में PM मोदी ने कहा- आजादी के बाद देश का प्रशासनिक तंत्र कई दशक तक उन्हीं इमारतों से चलाया गया, जिन्हें अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था। इन पुरानी इमारतों की हालत बहुत खराब है। इनमें रोशनी, जगह और वेंटिलेशन की भी ठीक व्यवस्था नहीं है।
होम मिनिस्ट्री का काम भी पुरानी बिल्डिंग में हो रहा
PM ने आगे कहा- क्या आप सोच सकते हैं कि होम मिनिस्ट्री जैसी अहम मिनिस्ट्री का काम पिछले 100 साल से पुराने बिल्डिंग में हो रहा था। कर्तव्य भवन सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं, बल्कि विकसित भारत को साकार करने की एक शुरुआत है। आगे चलकर इसी बिल्डिंग से देश की तरक्की तय होगी।
यहां कई मंत्रालयों के दफ्तर
कर्तव्य भवन-3 लगभग 1.5 लाख स्कॉयर मीटर में फैला हुआ है। इस नई बिल्डिंग में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, MSME मंत्रालय, कर्मचारी चयन एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के ऑफिस शिफ्ट होंगे।
पुराने और खस्ताहाल हो चुके ऑफिसेज से निजात
कर्तव्य भवन-3 पुराने और खस्ताहाल हो चुके सचिवालय जैसे शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग और निर्माण भवन की जगह लेगा, जो 1950-1970 में बने थे। ये अब आउटडेटेड हो चुके हैं। इस तरह इनके रखरखाव और मरम्मत का खर्चा भी बचेगा।
7 मंजिला बिल्डिंग, यहां 650 गाड़ियों की पार्किंग
कर्तव्य भवन को आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इस 7 मंजिला बिल्डिंग में दो बेसमेंट भी हैं। यहां कर्मचारियों की सुविधा के लिए योग और मेडिकल सेंटर, कैफे और मल्टी पर्पज हॉल की भी व्यवस्था है। लगभग 650 गाड़ियों की पार्किंग है। यहीं नहीं, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए चार्जिंग पॉइंट्स भी बनाए गए हैं।
इसके अलावा बिल्डिंग में ऐसे ग्लास लगाए गए हैं, जो बाहरी शोर और तापमान को कम करने में मदद करेंगे। साथ ही, बिजली उत्पादन के लिए सोलर पैनल का इस्तेमाल किया गया है। सोलर लगने से हर साल 5.34 लाख यूनिट बिजली पैदा होगी।

क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट भारत सरकार का बड़ा प्रोजेक्ट है। इस योजना के तहत संसद भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय, उप-राष्ट्रपति आवास, सरकारी इमारतें और एक नया कॉमन सेंट्रल सेक्रेटरिएट (CSS) बनाया जा रहा है।
इसका उद्देश्य सरकारी दफ्तरों को एक जगह पर लाना, पुरानी और जर्जर हो चुकी बिल्डिंग्स को बदलकर सरकारी कामकाज को आसान बनाना है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का टोटल बजट 20 हजार करोड़ रुपए है। पूरी खबर पढ़ें..

