सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की अर्जी खारिज : 3 सदस्यीय पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी थी, घर से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे
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जस्टिस यशवंत वर्मा ने 3 सदस्यीय पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी थी। इसी साल मार्च में जस्टिस वर्मा के घर से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। (फाइल)
जस्टिस वर्मा कैश कांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस यशवंत वर्मा ने 3 सदस्यीय पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी थी। जस्टिस वर्मा के घर से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे।
जस्टिस वर्मा ने पैनल की रिपोर्ट को किया था चैलेंज
जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में इन हाउस रिपोर्ट को चैलेंज किया था। उन्होंने कहा था कि पैनल ने बिना सुने और निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए गलत निष्कर्ष दिया है। हाईकोर्ट के जज वर्मा ने आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बेसिक फैक्ट की जांच करने में विफल रही।
तत्कालीन CJI ने दी थी रिपोर्ट
पिछले महीने तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने कमेटी की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जजों को हटाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
क्या है मामला
14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। जहां कथित तौर पर आग से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने खुद जले हुए नोटों का वीडियो सार्वजनिक किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने एक 3 सदस्यीय जांच पैनल बनाया। बाद नें उन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया था।
महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरु हुई है। जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ 145 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को प्रस्ताव सौंपा था।
राज्यसभा में भी जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए समिति गठन को पत्र दिया गया है। राज्यसभा में भी प्रस्ताव लाया गया था।
पूर्व राज्यसभा चेयरमैन जगदीप धनखड़ ने कहा था कि उन्हें जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग वाला एक प्रस्ताव मिला है। अगर दोनों सदन में एक ही दिन मोशन आता है तो यह सदन की प्रापर्टी हो जाता है।
सूत्रों ने बताया कि भारत में पहली बार किसी उच्च न्यायालय के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की जांच संविधान के आर्टिकल 124, 217 और 218 के तहत संसद में की जाएगी।
जानिए हाईकोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया
- हाईकोर्ट के जज को हटाने और उस पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के आर्टिकल 124 (4) में दी गई है। जज जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरुरी है।
- प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत करने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाते हैं। कमेटी में CJI, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद होते हैं। यह कमेटी ही आरोप तय करती है। अगर जज दोषी होते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
- महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। दोनों सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

