जज वर्मा कैश कांड: मानसून सत्र में आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव, रिजिजू बोले- संसद के पास जजों को हटाने का अधिकार
Published:
3 min read

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद के मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने उन पर आरोप सिद्ध किए थे।
पिछले महीने तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने कमेटी की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जजों को हटाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
जज वर्मा ने पैनल की रिपोर्ट को दी चुनौती
सूत्रों ने बताया कि जज वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है। यशवंत वर्मा ने पूर्व CJI संजीव खन्ना और 3 सदस्यीय पैनल के सजेशन को चैलेंज किया है। उन्होंने कहा कि पैनल ने बिना सुने और निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए गलत निष्कर्ष दिया है। हाईकोर्ट के जज वर्मा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बेसिक फैक्ट की जांच करने में विफल रही।
यह राजनीति नहीं भ्रष्टाचार का मुद्दा- संसदीय कार्य मंत्री
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में क्या हो रहा है, यह उससे स्वतंत्र है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने पर राजनीति नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि सरकार सबको साथ लेकर चलेगी। क्योंकि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच कोई मतभेद नहीं है। बताया जा रहा है कि रिजिजू पहले ही विपक्षी नेताओं को बता चुके हैं कि इस मामले पर एकजुट होना पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार इसी मानसून सत्र में जज को हटाने की प्रक्रिया पूरी करना चाहती है।
क्या है मामला
14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। जहां कथित तौर पर आग से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने खुद जले हुए नोटों का वीडियो सार्वजनिक किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने एक 3 सदस्यीय जांच पैनल बनाया। बाद नें उन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया था।
हाईकोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया
हाईकोर्ट के जज को हटाने और उस पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के आर्टिकल 124 (4) में दी गई है। जज जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरुरी है।
प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत करने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाते हैं। कमेटी में CJI, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद होते हैं। यह कमेटी ही आरोप तय करती है। अगर जज दोषी होते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। दोनों सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

