जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से अब तक 65 की मौत: सैकड़ों घायल, रेस्क्यू दूसरे दिन भी जारी; एयरफोर्स भी अलर्ट मोड पर
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गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से तबाही मच गई।
गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से तबाही मच गई। अब तक 65 लोगों की जान चली गई है। इसकी पुष्टि जम्मू-कश्मीर के एक मंत्री जावेद डार ने की। मृतकों मेें ड्यूटी पर तैनात CISF के 2 जवान भी शामिल हैं। 167 से ज्यादा घायल हैं। इसमें 38 की हालत गंभीर बताई जा रही। सैकड़ों लापता हैं। यहां के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला का कहना है कि मलबे में 500 लोगों के दबे होने की आशंका है।
PM मोदी ने जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला से हालात का जायजा लिया है। इससे पहले होम मिनिस्टर अमित शाह ने कल ही जम्मू-कश्मीर के LG मनोज सिन्हा और CM अब्दुल्ला से बात की थी। NDRF की दो टीमें भी हादसे वाली जगह पर भेज दी गई थीं।
अलर्ट मोड पर इंडियन एयरफोर्स
ANI के मुताबिक, रेस्क्यू के लिए इंडियन एयरफोर्स भी तैयार है। फिलहाल, दो MI-17 हेलिकॉप्टर और एक एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर अलर्ट मोड पर है। जैसे ही मौसम सही होगा, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाएगा।
हादसे से जुड़े अपडेट्स
- इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 65 लोगों की मौत की पुष्टि। बादल फटने से आई बाढ़ में 16 घर, सरकारी इमारतें, कई दुकानें और मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए।
- हादसे की वजह से किश्तवाड़ में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया। सिर्फ झंडा फहराया गया।
- NDRF की तीन टीमें घटनास्थल पर मौजूद। सेना की भी कई यूनिट रेस्क्यू में शामिल। राष्ट्रीय राइफल्स के जवान भी बचाव कार्य में लगे हुए हैं।
- फिलहाल कितने लोग फंसे हुए हैं, इसका सही पता नहीं चल पा रहा। खराब मौसम की वजह से प्रभावित इलाकों से संपर्क टूट गया है। वहां बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। फारुख अब्दु्ल्ला ने 500 लोगों के दबे होने की आशंका जताई है। ऐसे में मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
धार्मिक यात्रा के लिए जुटे थे श्रद्धालु
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां बादल फटा वहां 1200 लोग मौजूद थे। वे सभी वहां धार्मिक यात्रा के लिए आए थे। वहीं से मचैल माता मंदिर जाने का रास्ता है। हर साल अगस्त में यहां हजारों श्रद्धालु आते हैं। मचैल माता मंदिर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पद्दार उप-मंडल के मचैल गांव में स्थित है।
यह मंदिर मां दुर्गा के एक रूप मचैल देवी को समर्पित है। इसे मचैल चंडी माता भी कहते हैं। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की ऊंचाई पर है। हर साल अगस्त महीने में हजारों श्रद्धालु मचैल माता मंदिर की यात्रा करते हैं। मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है। भक्तों को पहाड़ों के बीच ट्रैकिंग करनी पड़ती है।
5 अगस्त को धराली में बादल फटने से भी तबाही
इससे पहले 5 अगस्त को उत्तराखंड के धराली में बादल फटने से भयंकर तबाही आई थी। उस हादसे मे 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल दिया गया है। लगभग 45 लोग अभी भी लापता हैं।
जानिए बादल क्यों फटते हैं
बादल इसलिए फटते हैं क्योंकि वे बहुत ज्यादा पानी और नमी इकट्ठा कर लेते हैं। जब गर्म हवा नमी से भरे बादलों को ऊपर की तरफ धकेलती है और ये ठंडी हवा से टकराते हैं, तो बादलों में जो पानी होता है, वो बूंदों में बदलकर भारी हो जाता है।
जब बादलों के अंदर पानी का दबाव बहुत अधिक हो जाता है और वे उसे सहन नहीं कर पाते, तो बादल अचानक फट जाते हैं। इससे बहुत तेजी से बारिश होती है। ये घटना खासकर पहाड़ी इलाकों में ज्यादा होती है, क्योंकि वहां हवा की दिशा और तापमान में बदलाव के कारण बादल एक जगह ठहर जाते हैं। बादल फटने से अचानक बाढ़ और तबाही भी हो सकती है।

