पहलगाम हमले के आतंकियों को पनाह देने वाले आरोपियों का नहीं होगा पॉलीग्राफी टेस्ट: जम्मू कोर्ट ने खारिज की NIA की याचिका
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22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
जम्मू की एक कोर्ट ने नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जांच एजेंसी ने पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को पनाह देने वाले दो आरोपियों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की मांग की थी।
स्पेशल जज संदीप गंडोत्रा ने कहा- नार्को एनालिसिस, पॉलीग्राफ एग्जामिनेशन टेस्ट कराना संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत आत्म-दोष के खिलाफ अधिकार का उल्लंघन होगा। संविधान के आर्टिकल 20(3) में बताया गया है कि किसी भी अपराध के आरोपी को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
जून में गिरफ्तार हुए थे दोनों आरोपी
दरअसल, पहलगाम में इस साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। आतंकियों को पनाह देने के आरोप में बशीर अहमद जोथाद और परवेज अहमद को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पहलगाम के ही रहने वाले हैं।
NIA ने याचिका में बताया था कि आरोपियों के बयानों में काफी विरोधाभास है। इसी वजह से जांच को आगे बढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 22 जून को गिरफ्तारी के बाद से दोनों कस्टडी में हैं। ऐसे में NIA ने दोनों का पॉलीग्राफी/नार्को टेस्ट कराने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। जांच में सटीक और ठोस सबूत इकट्ठा करने के लिए आरोपियों का पॉलीग्राफ किया जाना जरूरी है। NIA ने बताया, अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए लाइ डिटेक्टर टेस्ट और नार्को के लिए सहमति दी है।
अपनी याचिका के सपोर्ट में NIA ने सुप्रीम कोर्ट के 2017 के एक फैसले का भी जिक्र किया था, जिसमें ये कहा गया था कि चाहे आपराधिक मामला हो या फिर अन्य केस, किसी भी व्यक्ति को किसी भी तकनीक का जबरन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि, जरूरी सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करके आरोपी की स्वेच्छा से तकनीक का इस्तेमाल करके पूछताछ की जा सकती है।

