इंडियन रेलवे सफाई के मामले में फिसड्डी: CAG की रिपोर्ट में दावा- 5 साल में ट्रेन टॉयलेट्स को लेकर एक लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं; ट्रेनों में पानी की किल्लत
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इंडियन रेलवे को 1 लाख 280 पानी समस्या से जुड़ी शिकायतें मिली। 33.84 प्रतिशत शिकायतें समय पर सोल्व नहीं किया गया।
इंडियन रेलवे में टॉयलेट और वॉसबेसिन में साफ-सफाई को लेकर शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रही। 5 साल रेलवे को इससे जुड़ी 1 लाख 280 शिकायतें मिली है। नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। इसके साथ ही ट्रेनों में पानी की कमी की भी शिकायतें मिली हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद भी रेलवे ने शिकायतों का निपटारा नहीं किया।
मानसून सत्र में CAG रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि 33 हजार 937 मामलों में 33.84 प्रतिशत शिकायतें ऐसी रहीं जिन पर एक्शन लेने में जरूरत से ज्यादा समय लगा।
बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों की शिकायत हुई
इस ऑडिट रिपोर्ट मे लंबी दूरी की ट्रेनों में 2018-19 से 2022-23 तक की साफ-सफाई का ब्यौरा पेश किया गया है। CAG रिपोर्ट में दावा किया है कि बड़ी संख्या में पैसेंजर्स ने ट्रेन के सफाईकर्मियों की शिकायत की है।
96 ट्रेनों में बायोटॉयलेट्स की सफाई का सर्वे
रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग रुट पर चलने वाली ट्रेनों के बायोटॉयलेट्स की साफ सफाई को लेकर बड़े स्तर पर सर्वे किया गया है। कम से कम पांच रेलवे जोन से होकर गुजरने वाली 96 चुनिंदा ट्रेनों के 2,426 पैसेंजर्स से इन टॉयलेट्स की सफाई को लेकर सवाल किए गए। पांच रेलवे जोन के 50% पैसेंजर्स संतुष्ट नजर आए। वहीं, दो जोन में सिर्फ 10% यात्रियों ने सफाई अच्छी होने की बात कही।
ट्रेनों में पानी की किल्लत से जूझ रहे यात्री
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रेनों में यात्री पानी की किल्लत से भी जूझ रहे हैं। 2022-23 के दौरान ट्रेनों के टॉयलेट और वॉसबेसिन में पानी नहीं होने से जुड़ी 1 लाख 280 शिकायतें की गई। 33,937 यानी कि 33.84% मामलों में शिकायतों का निपटारा करने में उम्मीद से ज्यादा वक्त लगा।
रेलवे ने शुरू की है QWA व्यवस्था
CAG ने ट्रेन कोचेज में पानी की उपलब्धता की भी जांच की। इसमें पाया गया कि लोगों ने बड़े पैमाने पर ट्रेन में पानी की कमी होने की शिकायत की। तय वाटरिंग स्टेशनों पर ट्रेनों में पानी नहीं भरने की वजह से ऐसी शिकायतें मिलीं। इसके लिए ट्रेनों में पानी भरने वाले कर्मचारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। ट्रेनों में पानी की कमी से जुड़ी समस्या का समाधान करने के लिए रेलवे ने कदम उठाए हैं। 2017 में वाटरिंग स्टेशनों पर क्विक वॉटरिंग अरेंजमेंट (QWA) यानी ट्रेनों में तुरंत पानी भरने की व्यवस्था शुरू की गई।
28 स्टेशनों पर ट्रेनों में देरी से भरा जा रहा पानी
ऑडिट में पाया गया कि 31 मार्च 2023 तक ट्रेनों में पानी भरने के लिए तय 109 स्टेशनों में से 81 स्टेशनों पर यह काम सही ढंग से किया जा रहा था। वहीं, 9 रेलवे जोन के 28 स्टेशनों पर इसमें देरी हो रही थी। कैग के मुताबिक, फंड की कमी, ठेकेदारों के सही समय से काम ना करने और शेल्विंग या शिफ्टिंग से जुड़े कामों की वजह से इन स्टेशनों पर ट्रेनों में पानी नहीं भरा जा रहा था।
OBH सर्विस से संतुष्ट नजर आए पैंसेंजर्स
रेलवे की ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) से जुड़े सर्वे में पैंसेंजर्स का सैटिसफैक्शन लेवल 54 प्रतिशत से 84 प्रतिशत के बीच रहा। वहीं, उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के 95% पैसेंजर्स इस सुविधा से संतुष्ट नजर आए। ऑडिट में पश्चिमी रेलवे को लेकर पॉजिटिव रिसपोंस मिली। जिसमें कांकरिया डिपो में बूट लॉन्ड्री का ऑपरेशन बेहतर ढंग से होने की बात सामने आई।

