जब कलमा न पढ़ पाने की वजह से पकड़ा गया भारतीय पायलट: कहानी फ्लाइट लेफ्टिनेंट जवाहर भार्गव की, जिन्हें 1971 युद्ध में बनाया गया युद्धबंदी
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1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह से मात दी थी। लेकिन इस युद्ध में कुछ भारतीय सैनिक गलती से बॉर्डर क्रास कर पाकिस्तान चले गए, इसके बाद उन्हें बंदी बना लिया गया। एक ऐसे ही वायुसेना के पायलट थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट जवाहर भार्गव। भार्गव विमान से पाकिस्तान पर हमले कर रहे थे, तभी पाकिस्तानी तोप का एक गोला उनके जेट में लगा। हालांकि, विमान क्रैश होने से पहले भार्गव ने खुद को इजेक्ट कर लिया। उन्होंने पाकिस्तानी नागरिकों को अपना नाम फ्लाइट लेफ्टिनेंट मंसूर अली बताया, लेकिन कलमा न पढ़ पाने की वजह से उन्हें पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़ लिया।
नक्शा न मिलने की वजह से से फंसे
भारत पाकिस्तान के बीच भीषण युद्ध चल रहा था। भारतीय विमान पाकिस्तानी सीमा में घुसकर मिसाइलें दाग रहे थे। एक विमान फ्लाइट लेफ्टिनेंट जवाहर भार्गव उड़ा रहे थे। पाकिस्तानी सेना का दागा हुआ एक गोला उनके विमान में लगा। हालांकि, भार्गव विमान क्रैश से पहले खुद को इजेक्ट कर लिया। प्लेन से बाहर आने के कुछ ही समय में प्लेन जल गया। किट लेने के बाद लेफ्टिनेंट भार्गव तेजी से अपने जलते हुए प्लेन से दूर भाग गए। किट में ढूंढने पर नक्शा नहीं मिला, वे भटक गए। कंपास की मदद से उन्होंने चलने की कोशिश की। तेज धूप, रेगिस्तान में कई किलोमीटर चलने के बाद पता चला कि वे तो दक्षिण की ओर बढ़ रहे हैं, यानी पाकिस्तान की तरफ। यहां तक पहुंचने में उनके पास रखा सारा पानी भी खत्म हो गया था। फिर भार्गव ने ऊंट को पिलाया जाने वाला गंदा पानी पीया और कुछ भर भी लिया।
आंखे खुली तो सामने कुछ लोग खड़े थे
भार्गव ने जल्दी से अपनी दिशा बदली, पानी देने वाले को कुछ पैसे देकर कहा कि किसी से कुछ कहे ना। आगे बढ़ने पर एक गड्ढे में थोड़ा रेस्ट कर आगे रात में चलने का सोचा लेकिन कुछ ही देर में ऐसा लगा कुछ लोगों ने उन्हे घेर लिया है। आगे खोली तो सामने गांव के कुछ लोग खडे थे। पूछने पर भार्गव ने बताया मैं फ्लाइट लेफ्टिनेंट मंसूर अली खां हूं। भिटाला के पास भारतीय सेना ने मेरा जहाज गिरा दिया।
भार्गव के लाख कहने पर भी वो लोग नहीं माने और उन्हे अपने साथ गांव ले गए। भार्गव को जब पता चला कि वह बॉर्डर से महज 15 किमी दूर है तो उन्हे बहुत दुख हुआ। गांव पहुंचने के बाद एक खटिया पर लेटा दिया फिर आए हेडमास्टर ने भी कई सवाल किये और बताया कि रेंजर्स को बता दिया गया है। भार्गव ने सोचा वे इस बीच भागने की कोशिश करेंगे। उन्होंने सिर्फ एक चाकू और पानी की बोतल अपने पास रखी बाकी पूरी किट का सामान बच्चों में बांट दिया।
रेंजर ने कलमा पढ़ने को कह दिया
4 रेंजर्स आए और भार्गव से सच उगलवाने की कोशिश की कि वे बच्चों में बांटी गई हर एक चीज का मुआयना करते हैं। तभी घड़ी पर मेक इन इंडिया लिखा हुआ था, जिससे उसे शक हुआ और रेंजर ने भार्गव से कहा कि अगर आप मुसलमान है तो कलमा पढ़ के बता दो। कमर दर्द, थकान, बहुत दिन हो गए पढ़े जैसे कई बहाने बनाने के बाद वे कलमा नहीं पढ़ पाए। रेंजर के पूछने पर वो बोले कि वे भारतीय वायु सेना के एक पायलट है और अब आप जो चाहे कर लीजिए।
आंखों पर पट्टी बांध ऊंट पर बैठाकर ले गए
रेंजर्स को जैसे ही मालूम हुआ कि वे भारतीय है उन्हें तुरंत बंदी बना लिया और ऊंट पर बैठाकर अपने साथ ले जाने लगे। रास्ते में उन्हें ये भी शक हुआ कि कहीं वे जासूस तो नहीं, ऐसा सोचकर एक रेंजर ने दूसरे रेंजर से कहा भी कि गोली मारो इसे बस इतना सुनकर वे डर गए। लेकिन ऐसा नहीं किया उन्हे बताया कि “आपको सेना के हवाले किया जाएगा”।
रावलपिंडी जेल में किया शिफ्ट
रावलपिंडी जेल में शिफ्ट करने के पहले उनसे कई लेवल पर पूछताछ हुई। यातनाएं दी गई। सेना के प्लान के बारे में पूछा जाता। सबसे अच्छा कमांडर कौन है पूछा जाता। हर सवाल का जवाब ना में भी नहीं दिया जा सकता। कई बार वे अपने भाई बहनों का नाम ले लेते। सबसे अच्छे कमांडो के बारे में पूछने पर कहा कि मैं खुद हूं आपके सामने। सिगरेटों से भी दागा जाता। इन यातनाओं के कारण उनका स्पाइनल कोड डैमेज हो गया जिससे फिर कभी वे प्लेन नहीं उड़ा पाएं।
एक साल बाद किया रिहा
आखिरकार एक साल तक यातनाएं झेलने के बाद वतन वापसी का दिन आ ही गया। 1 दिसंबर 1972 को वाघा बॉर्डर ले जाया गया। उस दिन उस बॉर्डर से 12 पायलट, 6 आर्मी ऑफिसर, 600 जवान वापस वतन लौटे थे।

