आर्मी की तीसरी आंख बनेगी बाज बटालियन: दुश्मन की हर हरकत पर नजर रहेगी; जानें Baaz Battalion के बारे में सबकुछ
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बाज बटालियन एक बड़े सेंट्रल हब की तरह काम करेगी, जहां फ्लाइट, डेटा और जमीन पर मौजूद सैनिकों के बीच तालमेल बिठाया जाएगा। (AI इमेज)
नेशनल डेस्क. दुनिया में वॉर की तकनीक बदल रही हैं। हाल के ऑपरेशन्स से मिले एक्सपीरियंस के आधार पर आर्मी ने पाकिस्तान से लगे बॉर्डर पर अपनी पहली खास ड्रोन बटालियन बनाई है। इससे निगरानी और टोह लेने की क्षमता का एक एडवांस लेवल तैयार किया है।
इस बटालियन का नाम है, बाज बटालियन। इस यूनिट को जालंधर में तैयार किया गया है और यह 11 कॉर्प्स के तहत काम करती है। यह कॉर्प्स नॉर्थ पंजाब में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के कुछ सबसे सेंसिटिव इलाकों की सुरक्षा करेगी।
क्यों खास है ये बटालियन, जानिए।
क्या है बाज
बाज (Hawk) पक्षी अपनी तेज नजर के लिए जाना जाता है, और यही काम इस बटालियन के ड्रोन करेंगे। आर्मी अब ड्रोन को केवल युद्ध के मैदान में अलग-अलग इस्तेमाल होने वाले साधनों के तौर पर देखने के बजाय, एक ड्रोन नेटवर्क (interconnected drone architecture) को तैयार करने में जुटी है।
ड्रोन का पूरा सिस्टम
बाज बटालियन एक बड़े सेंट्रल हब की तरह काम करेगी, जहां फ्लाइट, डेटा और जमीन पर मौजूद सैनिकों के बीच तालमेल बिठाया जाएगा।
बड़े और ताकतवर ड्रोन
इस यूनिट में अमेरिका और इजरायल में बने और ज्यादा देर तक उड़ने वाले ड्रोन (जैसे MQ-9B, हेरॉन और हर्मीस) शामिल किए जाएंगे।
दुश्मनों पर गहरी नजर
इन आधुनिक ड्रोन्स की मदद से भारतीय सेना दुश्मन के इलाके में काफी अंदर तक नजर रख सकेगी। दुश्मन कहां छिपे हैं या कैसे आगे बढ़ रहे हैं, इसकी साफ तस्वीर तुरंत मिल जाएगी।
इसके साथ ही सेना में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, पूरी सेना को आधुनिक बनाने के लिए अलग-अलग हिस्सों में ड्रोन शामिल किए जा रहे हैं।
पैदल सेना (Infantry)
इन्हें अशनी' (Ashni) प्लाटून दिए जा रहे हैं, जिनमें छोटे क्वाडकॉप्टर ड्रोन होंगे।
तोपखाना (Artillery)
इन्हें दिव्यास्त्र और शक्तिबान नाम की यूनिट्स दी जा रही हैं, जो लंबी दूरी के ड्रोन से लैस होंगी।
बख्तरबंद सेना (Armoured Corps)
इन्हें शौर्य स्क्वाड्रन दिए जा रहे हैं।
AI की मदद से एनालिसिस
इतने सारे ड्रोन आसमान से बहुत सारा डेटा भेजेंगे। इस डेटा को एनालिसिस करने लिए सेना AI तकनीक का इस्तेमाल करेगी, ताकि युद्ध के समय तुरंत और सही फैसले लिए जा सकें।
यह कदम क्यों उठाया गया?
चीन के साथ बॉर्डर पर हुए लंबे तनाव और पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर से सेना ने यह सीखा है कि लगातार खुफिया जानकारी जुटाना कितना जरूरी है। जालंधर में पहले से ही सेना के हेलीकॉप्टर मौजूद हैं, और अब बाज बटालियन के आने से बॉर्डर और भी ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। आने वाले समय में सेना ऐसी और भी बटालियन बनाने की प्लानिंग कर रही है।

