भारत-चीन बॉर्डर ट्रेड शुरु होने पर नेपाल की आपत्ति: भारत ने कहा- दावे एकतरफा और बेबुनियाद, हम लिपुलेख रुट से 1954 से काराेबार कर रहे
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लिपुलेख दर्रे की सड़क का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई 2020 को किया था। नेपाल इसे अपना हिस्सा बताता है। (फाइल)
भारत और नेपाल एक बार फिर लिपुलेख को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल, भारत ने चीन के साथ ट्रेड के लिए लिपुलेख बॉर्डर खोलने का फैसला किया है। इसके लिए लिपुलेख पास खोला गया है। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाल ने एक बार फिर दावा किया कि लिपुलेख हमारा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है- नेपाल के दावे एकतरफा और बेबुनियाद हैं। इस रूट पर कोई पहली बार ट्रेड शुरू नहीं हो रहा। 1954 से इस रास्ते से भारत-चीन के बीच कारोबार हो रहा है।
इस रुट से 71 साल से हो रहा ट्रेड
नेपाल ने बुधवार को लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन बॉर्डर ट्रेड फिर से शुरू होने का विरोध किया था। इस पर भारत ने कहा कि नेपाल के दावे न तो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं और न ही ये सही हैं। रंधीर जायसवाल ने कहा- इस रुट से बीते 71 साल से भारत-चीन का ट्रेड चल रहा है। हालांकि, बीते कुछ साल में कोरोना महामारी और दूसरी वजहों से इस रास्ते से ट्रेड बंद किया गया था।
भारत ने नेपाल के दावों को बताया एकतरफा
भारत ने साफ कहा कि नेपाल की ओर से 2020 नक्शा बदला गया था और लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने इलाके में दिखाया गया। यह बनावटी और झूठा है। जायसवाल ने कहा- ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही सबूतों से इन्हें साबित किया जा सकता है। सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों का हल बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। नेपाल का इस इलाके को अपना बताना एकतरफा दावा है। ये हमें मंजूर नहीं है।
नेपाल ने कहा लिपुलेख हमारा इलाका
नेपाल ने लिपुलेख पास शुरू होने के बाद कहा- लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा महाकाली नदी के पूर्व में आते हैं। इसलिए ये हमारे देश का हिस्सा है। हमने इस इलाके को अपने ऑफिशयल मैप में शामिल किया है। नेपाल का संविधान भी इन तीनों इलाकों को अपने देश का हिस्सा मानता है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा- भारत और चीन को इस क्षेत्र में किसी भी तरह का कंस्ट्रक्शन, सड़क बनाना या बॉर्डर ट्रेड नहीं करना चाहिए। ये क्षेत्र नेपाल की संप्रभुता का हिस्सा हैं।
नेपाल ने कहा- हमने चीन सरकार को पहले ही साफ कर दिया है कि यह इलाका नेपाल का है। भारत-चीन ट्रेड के ऐलान पर नेपाल को कड़ा एतराज है। नेपाल सरकार ने कहा कि सीमा विवाद का हल ऐतिहासिक संधियों, समझौतों, नक्शों और सबूतों के आधार पर होना चाहिए। नेपाल और भारत को यह मुद्दा आपसी रिश्तों की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए सुलझाना चाहिए।
नेपाल भारत के तीन इलाकों के अपना बता रहा
नेपाल ने जून 2020 में अपने संविधान संशोधन के जरिए नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इस नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। भारत ने नेपाल के इस कदम का विरोध किया था। भारत ने कहा था कि नेपाल ने एकतरफा फैसला लेते हुए इन इलाकों को अपने नक्शे में शामिल किया है। इस रास्ते को ट्रेड के लिए खोलने ऐलान होते ही नेपाल ने एक बार फिर से अपना पुराना दावा दोहराया है।

