भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब: सिंधु जल समझौता पर बने ट्रिब्यूनल कोर्ट को बताया अवैध, कहा- इसे ना तो कभी मान्यता दी है और ना देंगे
Published:
3 min read

विदेश मंत्रालय ने इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत बने कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को सिरे से खारिज कर दिया है।
भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान की एक और चाल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब कर दिया। विदेश मंत्रालय ने इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत बने कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि यह कोर्ट न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इस संधि का खुला उल्लंघन भी है। भारत ने इसे सिंधु जल समझौता को लागू कराने की पाकिस्तान की एकतरफा कोशिश बताया। भारत ने कहा कि इस कोर्ट को न तो कभी मान्यता दी गई है, न ही दी जाएगी।
विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
विदेश मंत्रालय ने पांच बिंदुओं वाला आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं पर जो सप्लिमेंटल ऑर्डर आया है, वह पूरी तरह से शून्य है। यह निर्णय उस तथाकथित कोर्ट ने दिया, जिसे भारत ने कभी वैध नहीं माना। मंत्रालय ने साफ कहा कि जब उस कोर्ट का अस्तित्व ही संदेहास्पद है, तो उसका कोई भी फैसला अमान्य माना जाएगा। भारत ने कहा कि कथित ट्रिब्यूनल की कोई भी कार्यवाही सिंधु जल समझौता का सीधा उल्लंघन है।
आतंकवाद खत्म करने पर ही मिलेगा पानी
भारत ने यह भी साफ किया कि सिंधु जल समझौता अब पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया। मंत्रालय ने कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से हर तरह का आतंकवाद खत्म नहीं करता, भारत इस संधि का पालन नहीं करेगा। यह स्थगन पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत के संप्रभुता के अधिकार के तहत किया गया है। यह भारत की नई नीति का हिस्सा है, जिसके तहत पानी का हक उसी को मिलेगा जो शांति चाहते हैं।
यह ट्रिब्यूनल कोर्ट सिर्फ पाकिस्तान का झूठ
भारत ने कहा कि झूठ बोलना और धोखा देना पाकिस्तानी की पुरानी आदत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कोर्ट सिर्फ एक ढोंग है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों को गुमराह करने के लिए इस कोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह तथाकथित कोर्ट पाकिस्तान के इशारे पर काम कर रहा है और इसकी कोई कानूनी हैसियत नहीं है। भारत ऐसे किसी भी फोरम को नहीं मानता जो संधि का उल्लंघन करता हो।
भारत ने बताई समझौता तोड़ने की वजह
भारत ने इस पूरे विवाद का असली कारण भी साफ कर दिया। मंत्रालय ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने यह फैसला किया कि अब खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। प्रधानमंत्री मोदी ने यह चेतावनी पहले ही दी थी। अब जब तक पाकिस्तान हर आतंकी ढांचे को खत्म नहीं करता, उसे न तो पानी मिलेगा, न बातचीत का हक। भारत अब आतंक और बातचीत साथ नहीं चलने देगा।
1960 में दोनों देशों के बीच हुई थी संधि
1960 में भारत-पाकिस्तान के बीच यह संधि हुई थी। भारत ने दरियादिली दिखाते हुए पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदी का पानी देने का फैसला किया था। इसके बदले भारत को ब्यास, सतलुज और रावी नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने का अधिकार था। लेकिन पाकिस्तान ने भारत की इस दरियादिली का जवाब आतंकवाद फैलाकर दिया। पाकिस्तान ने भारत की ओर से बनाए जाने वाले बांधों पर भी आपत्ति जताई। अब भारत ने साफ कर दिया है कि उदारता की कोई सीमा होती है।
""

