SCO में भारत का सख्त रुख: पहलगाम का जिक्र नहीं, बलूचिस्तान शामिल...चीन-PAK की साजिश नाकाम, राजनाथ सिंह का जॉइंट स्टेटमेंट पर साइन करने से इनकार
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SCO समित में राजनाथ सिंह का सख्त रुख
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन में हो रही शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (SCO) की मीटिंग में भारत की ओर से बड़ा और कड़ा फैसला लिया। उन्होंने उस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया जिसमें पहलगाम में हुए आतंकी हमले का ज़िक्र तक नहीं था, लेकिन बलूचिस्तान का उल्लेख कर भारत पर परोक्ष आरोप लगाया गया। यह वही हमला है जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। भारत के इस इनकार ने पाकिस्तान और उसके सपोर्टर चीन को साफ संकेत दे दिया है।
यह दस्तावेज चीन की अध्यक्षता में तैयार हुआ था, और इसमें पाकिस्तान की मनमर्जी साफ नजर आ रही थी। बलूचिस्तान का जिक्र कर भारत को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई, जबकि पहलगाम के नरसंहार को जानबूझकर अनदेखा किया गया। भारत बार-बार साफ कर चुका है कि बलूचिस्तान में अस्थिरता के लिए वह नहीं, बल्कि पाकिस्तान की फौज और ISI जिम्मेदार हैं, जो अपने ही नागरिकों पर जुल्म ढाते हैं और आतंक को पालते हैं। राजनाथ सिंह ने मीटिंग में यही बात दोहराई।
सदस्य देशों में नहीं बनी सहमति- विदेश मंत्रालय
इस पर भारत के विदेश मंत्रालय का भी बयान आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे रक्षा मंत्री SCO में डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग में शामिल हुए। यह बैठक दो दिनों तक चली। कल और आज। मैं समझता हूं वह ज्वाइंट स्टेटमेंट को अडॉप्ट नहीं कर सके। मैं यह भी समझता हूं कि कुछ सदस्य देश भी कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बना सके, इसलिए डॉक्युमेंट को औपचारिक रुप नहीं दिया जा सका। हमारी तरफ से, भारत चाहता था कि डॉक्युमेंट में टेरेरिज्म पर चिंताएं हो, जो किसी एक देश को स्वीकार नहीं था।
आतंकवाद पर राजनाथ सिंह ने लगाई पाकिस्तान की क्लास
इससे पहले राजनाथ सिंह ने रक्षामंत्रियों की बैठक में पाकिस्तान और चीन को बेनकाब कर दिया। उन्होंने कहा, कुछ देश आतंकवादियों को पनाह देने के लिए सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल नीतिगत साधन के रूप में कर रहे हैं। इतना ही नहीं राजनाथ सिंह ने कहा, आतंकवाद के दोषियों, प्रायोजकों और फंडिंग करने वालों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और इससे निपटने के लिए दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने कहा, हमारे क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौतियां शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित हैं। और इन समस्याओं का मूल कारण बढ़ती कट्टरता, उग्रवाद और आतंकवाद है। उन्होंने कहा, शांति-समृद्धि और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा, आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। SCO को इस खतरे से निपटने में दोहरे मानदंड अपनाने वाले देशों की आलोचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

