रेल के डिब्बों से लेकर फर्नीचर, लाइटें भी बांटी गईं: टॉस से तय हुआ बग्घी का मालिक; भारत-पाक में संपत्ति बंटवारा कैसे हुआ
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भारत-पाकिस्तान बंटवारे में सिर्फ सीमाओं या शहरों का पार्टिशन नहीं हुआ था। रेलवे, सेना और सरकारी संपत्तियों का भी बंटवारा हुआ था। आजादी के समय भारत के पास 400 करोड़ रुपए की नगदी थी। इसमें से 75 करोड़ रुपए पाकिस्तान को दिए गए। चल संपत्ति जैसे गाड़ी, जानवर, सरकारी उपकरण और कर्मचारियों को 80-20 के अनुपात में बांट दिया गया। भारत की आबादी ज्यादा थी, इसलिए उसे 80 फीसदी हिस्सा मिला।
संपत्तियों के बंटवारे के लिए कमेटी बनी
12 जून 1947 को पार्टिशन कमेटी बनाई गई। भारत डोमिनियन की तरफ से सरदार बल्लभभाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद इसमें शामिल थे। जबकि पाकिस्तान की तरफ से मोहम्मद अली जिन्ना और लियाकत अली खान थे। इस कमेटी की अध्यक्षता लॉर्ड माउंटबेटेन ने की। इस कमेटी ने निर्णय लिया कि कौन सी चीजें भारत को मिलेंगी और कौन सी पाकिस्तान को।
वित्तीय संपत्ति- भारत की टोटल नगदी में पाकिस्तान को 17.5% हिस्सा मिला। यानी टोटल 400 करोड़ रुपए में से 75 करोड़ उनके खाते में गए। पाकिस्तान को 75 में से 20 करोड़ 15 अगस्त 1947 को ही दे दिए गए थे। बाकी के पैसे सरदार बल्लभभाई पटेल ने रोक लिए थे। दरअसल, पाकिस्तान ने आजादी के तुरंत बाद कश्मीर पर कबाइलियों से हमला करवा दिया था।
इसी वजह से सरदार पटेल नाराज हो गए थे। हालांकि, बाद में महात्मा गांधी के कहने पर बाकी 55 करोड़ भी दे दिए गए। साथ ही, ब्रिटिशर्स जो भी कर्जा छोड़कर गए थे, उसका भी 82.5 फीसदी कर्ज भारत के जिम्मे आया। जबकि 17.5% हिस्सा पाकिस्तान को चुकाना था।
चल संपत्ति: रेलवे, फर्नीचर, सरकारी उपकरण, सैन्य संपत्ति और जानवरों का भी विभाजन हुआ। इसका 80% हिस्सा भारत और 20% पाकिस्तान को मिला। भारत में उस वक्त 26,421 मील लंबी रेल लाइन थी। पार्टिशन कमेटी ने तय किया कि इसमें 7112 मील रेल लाइन पाकिस्तान को मिलेगी।
रेल के डिब्बों को भी 80 और 20 के अनुपात में बांटा दिया गया। सरकारी दफ्तरों की कुर्सियों, मेज, कॉपी-कलम और लाइटों को भी इसी अनुपात में बांटा गया।
इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों को स्वतंत्रता दी गई कि वे अपने हिसाब से भारत या पाकिस्तान कहीं पर सेवा दे सकते हैं। यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों की भौगोलिक स्थिति और व्यक्तिगत इच्छा को ध्यान में रखते हुए की गई। हालांकि, इसकी वजह से दिक्कतें बहुत हुईं। सरकारी ऑफिसेज का बैलेंस बिगड़ गया। कहीं पूरी ऑफिस खाली हो गई तो कई जगह स्ट्रेन्थ से ज्यादा लोग आ गए।
अंत में एक चीज बची थी, वो थी वायसराय की बग्घी। भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस पर दावा ठोंका। अंत में टॉस किया गया। भारत जीत गया, जिससे बग्घी उसके खाते में आ गई। फिलहाल भारत के राष्ट्रपति खास मौकों पर इसका इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के हिस्से वाले पंजाब में हिंदू-सिखों ने लगभग 67 लाख एकड़ जमीन छोड़ी, जबकि मुसलमानों ने भारत के हिस्से वाले पंजाब में करीब 47 लाख एकड़ जमीन छोड़ी थी।
सैन्य संपत्ति- बंटवारे के वक्त भारत को 2.60 लाख सैनिक मिले जबकि पाकिस्तान को 1.40 लाख सैनिक मिले थे। सैनिकों का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था। बावजूद इसके 2 फीसदी मुस्लिम सैनिक भारत के साथ ही रहे। विभाजन के पहले भारतीय सेना में 30 से 35 प्रतिशत मुस्लिम सैनिक थे।
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