हमारा डिफेंस सिस्टम स्पेस में भी तैनात: S-400 के अलावा भारत के पास कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम; 2035 तक सुदर्शन चक्र से फुल प्रूफ एयर डिफेंस कवर
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डिफेंस एक्सपर्ट सृजन पाल सिंह का कहना है कि अगर पाकिस्तान भारत पर एटमी मिसाइल दागता है तो हमारा डिफेंस सिस्टम उसे पाकिस्तान की सरजमीं पर ही मार गिराएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश की सुरक्षा को लेकर बड़ा ऐलान किया। PM ने कहा- देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य की टेक्नोलॉजी बेस्ड चुनौतियों का सामना करने के लिए 2035 तक 'सुदर्शन चक्र' नाम से राष्ट्रीय सुरक्षा कवच तैयार किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के डिफेंस सिस्टम की दुनिया में तारीफ हो रही है। दरअसल, अपनी सरजमीं पर बने आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए थे। पाकिस्तान के निशाने पर भारत के सैन्य ठिकाने और सिविलियन एरिया थे। हालांकि, भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें हवा में ही मार गिराया। भारत के हाईटेक और देश में बने एयर डिफेंस सिस्टम ने सिक्योरिटी अमब्रेला की तरह काम किया।। अभी भारत के पास 2 प्रकार के डिफेंस सिस्टम हैं...
एडवांस एयर डिफेंस
पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम
इस स्टोरी में जानेंगे भारत का एयर डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है और क्या ये एटमी हमले रोकने में भी उतना ही कारगर और काबिल है...चलिए जानते हैं
एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम कम ऊंचाई वाले हमलों को रोकने में कारगर है। जबकि पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम स्पेस में होने वाले मिसाइल हमले को भी रोक सकता है।
आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम
भारत के पास आकाशतीर मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आकाशतीर में 4 तरह के एयर डिफेंस सिस्टम हैं। ये सभी इंटीग्रेटेड सिस्टम से जुड़े रहते हैं। एक-दूसरे को रियल टाइम इन्फॉर्मेशन शेयर करते हैं। इससे ये डिसाइड किया जा सके कि दुश्मन के किस ऑब्जेट (मिसाइल या ड्रोन) को किस तरह से मार गिराना है।
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम
भारत के पास इस वक्त दुनिया का सबसे पावरफुल और एडवांस्ड S-400 एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे रूस से खरीदा गया है। इसमे लगे मिसाइल 400 किमी (कई मामलों 550 किलोमीटर ) दूर ड्रोन, फाइटर जेट और मिसाइल को हवा में ही डिस्ट्राय करने की क्षमता रखता है। ये मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है।
S-400 का सिस्टम
-रडार
-कमांड पोस्ट
-लॉन्चर मिसाइल
इसका ऑपरेटिंग सिस्टम भी समझिए
सबसे पहले इसके सेंसर और रडार टारगेट डिटेक्शन यानी दुश्मन की तरफ से दागे गए मिसाइल या ड्रोन की पहचान करते हैं। टारगेट डिटेक्ट होने के बाद ये इंफोर्मेशन कमांड पोस्ट को भेजी जाती है। कमांड पोस्ट इस पूरे सिस्टम का ब्रेन की तरह काम करता है। ये देखकर एनालाइज करता है कि जो टारगेट आ रहा है वो कितना बड़ा है, कितनी उसकी स्पीड है, और मल्टीपल टारगेट आ रहे हैं तो सबसे पहले किसको फायर करना है।
सबसे महत्वपूर्ण टारगेट के हिसाब से कौन सी मिसाइल को लॉन्च करना है। ये सब तय करने के बाद बारी आती है मिसाइल लॉन्च करने की। यह काम ट्रक पर माउंटेड मिसाइल लॉन्चर करता है। हर लॉन्चर पर 4 ट्यूब होते हैं। इनके अंदर मिसाइल होती है। मतलब एक लॉन्चर पर 4 मिसाइल होते हैं। इनकी संख्या को जरुरत के हिसाब से बढ़ाया भी जा सकता है। ये कमांड पोस्ट से कनेक्ट होते हैं। एक एयर डिफेंस सिस्टम में 8 से 12 लॉन्चर मिसाइल यूनिट होते हैं। अभी भारत के पास 5 एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इनमें 160 मिसाइल हमेशा स्टैंड बाय मोड में रहती हैं।
मिसाइल कैसे काम करती हैं
लॉन्चर कोल्ड लॉन्च टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इसमें ट्बूव के नीचे एक गैस जनरेटर होता है। इस गैस जनरेटर में एक सॉलिड प्रोपेलेंट फ्यूल भरा जाता है। जब मिसाइल लॉन्च होती है तो हल्की चिंगारी से आग लगाई जाती है, जिससे हाई प्रेशर जनरेट होता है। ये प्रेशर पिस्टन पैड पर जाता है, इससे मिसाइल ऊपर उठने लगती है। मिसाइल के अंदर सॉलिड प्रोपेलेंट फ्यूल बर्न होने लगता है। इससे मिसाइल टारगेट की तरफ बढ़ने लगती है।
लॉन्च मिसाइल यूनिट 4 तरह की मिसाइल लॉन्च कर सकते हैं। लेकिन कई मिसाइल में एक्टिव रडार सिस्टम नहीं होता है। ऐसी मिसाइल को गाइड किया जाता है। मिसाइल को गाइड करने के लिए फायर कंट्रोल रडार स्टेशन होता है। ये लगातार मिसाइल की स्पीड और लोकेशन को फीड करता रहता है। इसी हिसाब से मिसाइल किसी भी ऑब्जेक्ट को हिट करता है।
किसी छोटे ड्रोन को हवा में डिस्ट्राय करने के लिए S-400 बहुत महंगा साबित होगा। इसके लिए इंडिया के पास एक और सिस्टम है आकाश मिसाइल सिस्टम। ये मिसाइल सिस्टम भारत के DRDO ने बनाया है और पूरी तरह से स्वदेशी है। ये सिस्टम 2007 से काम कर रहा है, इसमें 3 मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है। ये भी S-400 जैसी ही टेक्नोलॉजी पर ही काम करता है।
आकाश मिसाइल सिस्टम के 3 वर्जन है
-आकाश MK-I 30 किमी
-आकाश MK-II 40 किमी
-आकाश MK-II 50 किमी
MRSAM (MEDIUM RANGE SURFACE AIR MISSILE)
ये सिस्टम फास्ट मूविंग ड्रोन के हिसाब से ऑप्टिमाइज्ड है। 70 से 100 किमी के एरिया में अच्छे से काम कर सकता है।
इंटिग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड
ये सिस्टम भी स्वदेशी है। इसे DRDO ने बनाया है। इसमें सेंसर, सर्विलांस, हाई रेज्यूल्यूशन रडार का पूरा नेटवर्क है। ये सिस्टम छोटे-छोटे ड्रोन को 10 से 20 किमी रेंज में पकड़ने का काम करता है। रडार के अलावा इलेक्ट्रो ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर और कैमरा भी लगा होता है। कैमरा ऑब्जेट की इमेज दिखाता है, जबकि इंफ्रारेड सेंसर ऑब्जेक्ट की थर्मल इमेज जनरेट करते हैं। इसमें एक इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर यूनिट में रेडियो फ्रिक्वेंसी सेंसर इसके कम्यूनिकेशन सिस्टम को कंट्रोल करता है।
मान लो किसी ऑब्जेट को रडार देख भी नहीं पाया तो ये सिस्टम उसके 5 से 10 किमी रेंज में उसे डिटेक्ट कर लेगा।
इस सिस्टम ने पाकिस्तान की तरफ से आने वाले कई ड्रोन को मार गिराया। साथ ही इस सिस्टम में लेजर डायरेक्ट एनर्जी सिस्टम से भी ड्रोन को मार गिराया जा सकता है। ये 10 से 20 किलोवॉट की एनर्जी काम में लेता है। ड्रोन के ऊपर हाई पावर लेजर छोड़ता है, जिससे ड्रोन हवा में ही जलकर खत्म हो जाता है। इसकी रेंज 1 से 2 किमी ही है। अगर ड्रोन इससे ज्यादा दूर पर हैं तो एंट्री ड्रोन गन्स काम में लिए जाते हैं, जिनमें नेट लगे होते हैं और ड्रोन को हवा से नीचे ले आता है। इस सिस्टम में शॉर्ट रेंज मिसाइल भी होते हैं और बहुत जल्दी ही ऑपरेट करते हैं।
पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम
पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD) ये भारत में निर्मित बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर है। ये सिस्टम अंतरिक्ष में 80 किमी की ऊंचाई में दुश्मन के किसी भी ऑब्जेक्ट को नष्ट कर सकता है।
इसमें स्वर्ड फिस रडार सिस्टम है। जो 600 किमी दूर से दुश्मन के ऑब्जेट को डिटेक्ट कर सकता है। और 5 मेक की स्पीड से हमला करता है। ये भारत का सबसे पावरफुल एयर डिफेंस सिस्टम है।
क्या परमाणु हमला रोकने में सक्षम हैं भारत
अगर मान लीजिए पाकिस्तान शाहीन मिसाइल से भारत पर परमाणु हमला करता है तो हमारा पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम पाकिस्तान की मिसाइल को अंतरिक्ष में ही मार गिराएगा। इसके आलावा S-400 भी परमाणु हमले को रोकने में सक्षम हो सकता है।
भारत ने रुस से 2018 में S-400 के 35 हजार करोड़ में 5 स्क्वॉड्रन खरीदे थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, S-400 की एक मिसाइल की कीमत करीब 1 से 2 मिलियन डॉलर हो सकती है। अगर भारत S-400 डिफेंस सिस्टम किसी टारगेट को इंटरसेप्ट करता है तो 3 लाख डॉलर से लेकर 1 मिलियन डॉलर तक का खर्च आएगा। हालांकि भारत में बने आकाश एयर डिफेंस सिस्टम का खर्च S-400 की तुलना में बहुत कम होगा।
एंटी-सैटेलाइट मिसाइल
पृथ्वी डिफेंस सिस्टम के अलावा भारत अंतरिक्ष में किसी भी दुश्मन देश के सैटेलाइट को डिस्ट्राय कर सकता है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत स्पेस में सैटेलाइट को मार गिराने वाला चौथा देश है। 2019 से 2023 तक, जब भारत ने इसका टेस्ट किया था तो अमेरिका और चीन समेत कई देश हैरान रह गए थे। उस वक्त भारत पर टेस्ट रोकने का डिप्लोमैटिक प्रेशर भी बहुत था। हालांकि, सरकार ने प्रेशर को दरकिनार करते हुए सभी टेस्ट किए और सबसे खास बात ये कि इस मामले में भारत की टेक्नोलॉजी चीन से कहीं बेहतर साबित हुई।

