भारत के नक्शे से हिमाचल गायब हो जाएगा- SC: सुप्रीम कोर्ट बोला- भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप मानव निर्मित आपदाएं, राज्य में स्थिति बदतर
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क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा- वो दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। (फोटो- पीटीआई)
क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि वो दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का चिंताजनक प्रभाव पड़ रहा है। यहां परिस्थितियां बद से बदतर होती जा रही हैं।
रेवेन्यू ही सब कुछ नहीं- SC
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि हम राज्य सरकार और भरत संघ को समझाना चाहते है कि रेवेन्यू लाना ही सब कुछ नहीं है। पर्यावरण की कीमत पर रेवेन्यू अर्जित नहीं किया जा सकता। बेंच ने कहा कि अगर हालात नहीं बदले तो वह दिन दूर नहीं जब देश के नक्शे से हिमाचल प्रदेश गायब हो जाएगा।
राज्य सरकार ने श्री तारा माता हिल को ग्रीन एरिया घोषित किया
दरअसल, राज्य सरकार ने जून 2025 में शिमला के पास स्थित श्री तारा माता हिल को ग्रीन एरिया घोषित कर दिया था। ग्रीन एरिया घोषित होने के बाद यहां किसी भी तरह का निर्माण कार्य बिना सरकार की अनुमति के नहीं किया जा सकता हैं।
इसके खिलाफ एमएस प्रिस्टीन होटल्स एंड रिजार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा याचिका हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई जिस पर हाईकोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की ।
भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाएं मानव निर्मित: SC
सरकार ने पर्यावरण को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हिमाचल के 66% वन क्षेत्र को लालच और लापरवाह नीतियों ने खतरे में डाल दिया है।
राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने स्वीकार किया कि कोर्ट के आदेशों को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने कहा, हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाएं प्राकृतिक नहीं है बल्कि मानव निर्मित है।
SC ने चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
पर्यावरण के मुद्दे पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से 4 हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस रिपोर्ट में सरकार बताए कि अब तक क्या कदम उठाए और भविष्य में सरकार की क्या योजनाएं हैं। हिमाचल के पर्यावरण मंत्रालय और मुख्य सचिव को आदेश की कॉपी भेजी गई है।
अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। SC ने हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा और प्रिस्टीन होटल्स की याचिका खारिज कर दिया।

