वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर SC में सुनवाई : कोर्ट ने EC को सही ठहराते हुए कहा- नागरिकता के लिए सिर्फ आधार कार्ड वैलिड प्रूफ नहीं
Published:
3 min read

24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। फाइल फोटो।
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन (EC) को सही ठहराते हुए कहा कि आधार कार्ड भारत का नागरिक होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (Special Intensive Revision-SIR) पर सुनवाई के दौरान ये बात कही। सुनवाई अभी जारी है।
दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से कहा कि इलेक्शन कमीशन आधार, राशन कार्ड और यहां तक कि वोटर कार्ड को भी नागरिकता प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा। इसकी वजह से लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट सकते हैं।
आधार कार्ड जांच के बाद ही मान्य
कोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग यहां सही है कि आधार कार्ड को पूरी तरह सिटीजनशिप प्रूफ की तरह नहीं देखा जा सकता। इसकी जांच जरूरी है। इसे तभी स्वीकार किया जा सकता है कि जब स्वतंत्र रूप से इसकी जांच हो।
SIR के लागू होने से लाखों लोग वोट से वंचित रह जाएंगे
चुनाव आयोग के खिलाफ केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि SIR की वजह से बड़े पैमाने पर लोग वोटिंग से वंचित रह सकते हैं। खासकर, वे जो चुनाव आयोग के दिए जरूरी फॉर्म नहीं भर सकते।
आखिर SIR है क्या, इसे लेकर इतना विवाद क्यों
दरअसल, 24 जून को चुनाव आयोग ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने का ऐलान किया था। चुनाव आयोग का कहना है कि लगातार पलायन, युवा वोटरों को शामिल करने, मौतों की सूचना न देने, अवैध विदेशी प्रवासियों के शामिल होने और तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए वोटर लिस्ट रिवीजन जरूरी है। इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकेगा।
अब विवाद का विषय यह है कि विपक्ष को लगता है कि इस प्रक्रिया से लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि नए नियमों के तहत हर मतदाता को दस्तावेज जमा करना जरूरी है, जबकि बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास जरूरी कागजात नहीं हैं। इससे दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग के लोगों के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्ष को लगता है कि ये फैसला बिहार चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले से सिर्फ बीजेपी और NDA को फायदा होगा। चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि प्रक्रिया पारदर्शी है। सभी को दस्तावेज जमा करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। हालांकि, विपक्ष संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है। अब मामला कोर्ट में चल रहा है।
***

