आतंकी हाफिज सईद पर हमले की कहानी: बस 45 कदम दूर थी मौत, कोरोना ने कैसे बचाई मोस्ट वॉन्टेड आतंकी की जान?
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लश्कर चीफ हाफिज सईद ।
17 जुलाई 2019 की बात है, तब पाकिस्तान ने हाफिज सईद को गिरफ्तार किया था। उस समय पाक पर पूरी दुनिया का दबाव था। लेकिन हाफिज लाहौर में जौहर टाउन स्थित अपने घर पर ही रह रहा था। गिरफ्तारी के करीब दो साल बाद, 21 जून 2021 में लाहौर के जौहर टाउन में एक कार में ब्लास्ट हुआ। इसमें मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद का घर भी बुरी तरह डैमेज हुआ था। हालांकि हाफिज सईद बच गया था। इस ब्लास्ट में 3 लोगों की मौत हुई थी। जबकि 24 लोग घायल हुए थे। दावा किया जाता है कि इस हमले की प्लानिंग हाफिज सईद को गिरफ्तारी की खबर के बाद हुई थी।
हमले के डेढ़ साल पहले की प्लानिंग
‘आज तक’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक- आतंकी हाफिज सईद की गिरफ्तारी की खबर के कुछ महीने बाद 2019 में दुबई में एक मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ कि इस मिशन के लिए एक पाकिस्तानी ही होना चाहिए। जो वहां जाकर इस मिशन को अंजाम दे सके।
अब एक ऐसे पाकिस्तानी की तलाश की गई, जो दुबई में छोटे-मोटे क्राइम में जेल में बंद हो। पाकिस्तान में उसका कोई क्राइम रिकॉर्ड भी न हो। एजेंसी को मोहम्मद नवेद अख्तर खान नाम का एक पाकिस्तानी मिला। ऑपरेशन में शामिल एक शख्स ने जेल में ही नवेद से मुलाकात की। एजेंट ने खुद को पाकिस्तानी नागरिक बताया। वो शख्स पैसे खर्च करके नवेद को जेल से छुड़ा लाया। भरोसे में आने के बाद एजेंट ने नवेद से पाकिस्तान में एक बिजनेस खोलने की डील की।
एजेंट ने नवेद को बहुत सारे पैसे देकर पाकिस्तान भेज दिया। शख्स डील के लिए शर्त रखी कि ऑफिस लाहौर के जौहर टाउन में मकान नंबर E-116 के पास ही होना चाहिए। यह घर आतंकी सरगना हाफिज सईद का घर था।
हाफिज सईद के घर के पास खोला ऑफिस
नवेद को काफी मेहनत करने के बाद जौहर टाउन में मकान नंबर E-123 रेंट पर मिला। जो हाफिज सईद के मकान E-116 से 7 घर छोड़कर था। नवेद ने कंस्ट्रक्शन का बिजनेस शुरु किया। पैसों का इंतजाम नवेद का दुबई बेस्ड वो एजेंट ही कर रहा था। एजेंट और नवेद अब बिजनेस पार्टनर बन गए थे।
नवेद अपने ऑफिस के सामने से सेल्फी लेकर हैंडलर को भेजता था।
नवेद को धीरे-धीरे कई मकानों के कंट्रक्शन का काम मिलने लगा। एक बार उसे हाफिज सईद के घर का काम भी मिला। इस दौरान हैंडलर के लोग भी हिसाब-किताब के बहाने उससे मिलने आते थे। इस तरह हाफिज सईद के घर की रेकी की गई। हाफिज सईद के घर के वीडियो, उसके घर में कितने कमरे हैं, हाफिज सईद का किस कमरे में सोता है, यह सब जानकारी दुबई बेस्ड हैंडलर को भेजी गईं। हालांकि अभी भी नवेद इस ऑपरेशन से अंजान था। नवेद का कंट्रक्शन का बिजनेस अच्छा चल रहा था। एजेंट ने उससे एक टोयोटा कार खरीदने के लिए कह। नवेद ने कार खरीदी। अब वह कॉलोनी में इसी टोयोटा कार से आना-जाना करने लगा।
हाफिज सईद का घर, मदरसा, तौहीद मस्जिद भी इसी कॉलोनी में थी। आने-जाने के लिए 4 रास्ते थे। तीन रास्ते कभी-कभी ही खोले जाते थे लेकिन सिर्फ एक रास्ता ही पूरी तरह खुला रहता था। इस रास्ते पर पुलिस और सुरक्षा गार्ड आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखते थे। नवेद ने धीरे-धीरे पुलिस और सुरक्षा गार्डों का भरोसा जीत लिया था। नवेद को इसी कॉलोनी में एक 6 मंजिला मकान के रेनोवेशन का काम मिल जाता है। मिशन को अंजाम देने के लिए ये मकान सबसे अच्छी जगह थी।
अब नवेद से एक और ऐसी ही कार खरीदने के लिए कहा गया। दूसरी कार में भी कलर, इंटीरियर, सीट कवर सब कुछ वैसा ही किया गया जैसा पहले वाली कार में था। इस कार को 6 मंजिला मकान की पार्किंग में रखा जाता है। यह सब इसलिए किया गया, ताकि हाफिज सईद की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी कार में फर्क न कर सकें। पुलिस और सुरक्षा गार्ड नवेद को और उसकी कार को अच्छे से पहचानते थे। वो बिना रोक-टोक और सुरक्षा के कॉलोनी में आ जा सकता था।
गुल ने रखा था कार में विस्फोटक
नई कार को पार्क करके उसमें 300 किलोग्राम बारुद भरा गया। पंजाब (पाकिस्तान) की काउंटर टेरेरिज्म डिपार्टमेंट के अनुसार- ईद गुल ने कार में एक्सप्लोसिव रखा था। यह कार डेविड के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि इस कार से हाफिज सईद के घर को उड़ाने का प्लान था। इस कार को पार्किंग में सबसे छिपा कर ढंककर रखा गया था।
प्लान यह था कि बॉम्बर कार को हाफिज सईद के घर के गेट पर ले जाकर ब्लास्ट कराया जाएगा। लेकिन कार को वहां तक कौन ले जाएगा। इसके लिए अफगानिस्तान में एक आत्मघाती की तलाश की गई। सुसाइड बॉम्बर को पाकिस्तान से नवेद के घर पर लाया गया।
अब तक नवेद को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यहां तक सबकुछ प्लान के अनुसार ही चल रहा था। नवेद को बिना असलियत बताए आगे नहीं बढ़ा जा सकता था। एजेंट को डर ये था कि नवेद पाकिस्तानी ऑथोरिटी को न बता दे, अगर किसी को पता चलता है तो मिशन फेल हो जाएगा।
सारी बातें बताने के लिए हैंडलर ने एक कहानी बनाई। हैंडलर ने नवेद से 26/11 हमले में एक इजरायली फैमिली की मौत के बारे में बताया। उसने कहा कि हाफिज सईद इस हमले में शामिल था। अब वो उसे मारना चाहता है। इसलिए उसने उसे जौहर टाउन भेजा है। ताकि वो हाफिज सईद को मार सके। पहले तो नवेद डर गया। हैंडलर ने उसे 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपये और परिवार सहित तुर्की में शिफ्ट करने का ऑफर दिया। बड़ी रकम और तुर्की में शिफ्ट करने के ऑफर पर वो मान गया।
कोविड से हुई हैंडलर की मौत
ऑपरेशन करीब पहुंचने वाला ही था। उस टाइम कोरोना की दस्तक हो गई। जो हैंडलर नवेद से डील करता था। वो ईद की छुट्टी लेकर अपने घर चला गया। उसको कोरोना हो गया। कुछ दिन बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
हैंडलर की मौत से पूरे मिशन पर खतरा मंडरा रहा था। नवेद सिर्फ दुबई बेस्ड हैंडलर को ही जानता था। अब सवाल यह था कि मिशन को कैसे आगे बढ़ाया जाए। दूसरे शख्स ने नवेद से बात की लेकिन नवेद नए इंसान पर भरोसा नहीं कर पा रहा था। नवेद अब नए हैंडलर की बात भी नहीं सुन रहा था। टालमटोल करने पर दूसरे हैंडलर ने उसे धमकी दे दी और कहा कि अगर उसने अपना काम नहीं किया तो सारी जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को दे दी जाएगी। नवेद धमकी से इतना डर गया कि उसने अपने रिश्तेदार पुलिस वाले को सारी बातें बता दी। पुलिस वाला उसे हाफिज सईद के पास लेकर पहुंचा। हाफिज सईद को लगा कि पाकिस्तान में उसे कोई नहीं मार सकता। वो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देता। हालांकि उसने नवेद से जौहर टाउन छोड़ने के लिए कहा। अब हाफिज सईद की सुरक्षा में लगी पुलिस सतर्क हो गई। घर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। अब हाफिज सईद के घर से 45 कदम की दूरी तक ही पहुंचा जा सकता था।
नवेद अब हैंडलर का कॉल भी नहीं उठा रहा था। हैंडलर को लग रहा था नवेद ने पाकिस्तान ऑथोरिटी को सब बता दिया। अब तय किया गया जो भी हो मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। आखिरी में प्लान किया गया कि, कार को उसके घर के बाहर ही ब्लॉस्ट किया जाएगा। विस्फोटक इतना था कि हाफिज सईद के घर को नुकसान होगा, मुमकिन है हाफिज सईद मारा भी जाए।
21 जून 2021 की तारीख और सुबह 11 बजे ब्लास्ट के लिए चुना गया। ये समय इसलिए चुना गया, क्योंकि इस समय कॉलोनी में सन्नाटा रहता था। जिससे सिर्फ टारगेट को ही नुकसान हो, कोई निर्दोष न मारा जाए।
23 जून 2021 के दिन सुबह 11 बजे कार गेट से टकराई। भारी ब्लॉस्ट हुआ । लाहौर के जौहर टाउन में हमले के बाद की तस्वीर।
पंजाब (पाकिस्तान) की काउंटर टेरेरिज्म डिपार्टमेंट ने इस घटना के 15 महीने बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की। चार्जशीट में 8 नामजद आरोपियों के नाम शामिल थे। हालांकि ब्लास्ट में कोई भी बाहरी लिंक सामने नहीं आया। एक-एक करके सभी आरोपी पाकिस्तान पुलिस के गिरफ्त में आ जाते हैं।
2 साल के अंदर ही 7 को उम्रकैद
एंटी टेररिज्म कोर्ट ने 7 मार्च 2023 को समीउल हक, उजैर अकबर और नवेद अख्तर को जौहर टाउन बम ब्लास्ट में उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि 2022 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का हैंडलर ईद गुल, पीटर पॉल डेविड, सज्जाद शाह और जियाउल्लाह को कोर्ट ने 2022 में मौत की सजा सुनाई थी। एक और अन्य आरोपी आयशा बीबी को 5 साल की कैद हुई।
कई देशों की करंसी मिली
जांच में पाकिस्तानी एजेंसी को ईरान, UAE, तुर्कीए, अफगानिस्तान और पाकिस्तान की करंसी, लेपटॉप और अन्य इलेक्ट्रिक डिवाइस मिले थे जिनका इस्तेमाल ब्लास्ट में किया गया था।

