डिजिटल अरेस्ट का लाइव स्टिंग ऑपरेशन: गुजरात पुलिस ने 1000 करोड़ का साइबर फ्रॉड पकड़ा; ₹200 के ट्रांसजेक्शन से आरोपी ट्रेस
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आरोपी के फोन में एक संदिग्ध नंबर China Ma'am 4 के नाम से सेव मिला है। पुलिस को शक है कि ठगी का पैसा चीन भेजा जा रहा था। (ai image)
नेशनल डेस्क. गुजरात पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट का लाइव स्टिंग ऑपरेशन करके 1 हजार करोड़ रुपए के साइबर क्राइम नेटवर्क का खुलासा किया है। आरोपी को पकड़ने के लिए साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCoE) ने एक ड्रामेटिक 'लाइव स्टिंग ऑपरेशन' किया।
पुलिस ने असम से 25 वर्षीय रफिकुल आलम को गिरफ्तार किया है। यह सिंडिकेट डिजिटल अरेस्ट के जरिए भोले-भाले लोगों को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपए ऐंठ रहा था, जिसके तार चीन और कंबोडिया से जुड़े होने का शक है।
जानिए, 200 रुपए के ट्रांजेक्शन से आरोपी कैसे पकड़ा गया और क्या है इसका चीन-कंबोडिया कनेक्शन।
कैसे शुरू हुआ यह 'स्टिंग ऑपरेशन'?
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब अहमदाबाद के एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी ने 9 अगस्त को साइबर पुलिस से संपर्क किया। स्कैमर्स ने पीड़ित को करीब एक हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। ठग खुद को नासिक पुलिस का अधिकारी बता रहा था। उसने पीड़ित को चाइल्ड पोर्नोग्राफी में फंसाने का फर्जी सुप्रीम कोर्ट नोटिस भेजा था।
SP विवेक भेडा के मुताबिक, पीड़ित हर दिन 3-4 घंटे ठगों से कॉल पर बात करता था। वह इतना डर गया था कि उसने अपनी पत्नी के अकाउंट से पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर किए, ताकि ठगों को 20 लाख रुपए दे सके।
200 रुपए की वजह से ट्रेस हुआ आरोपी
पुलिस ने पीड़ित से कहा, वह ठगों के साथ 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का नाटक जारी रखे। पुलिस के निर्देश पर पीड़ित ने अकाउंट वेरिफिकेशन के बहाने ठगों के बैंक खाते में सिर्फ 200 रुपए ट्रांसफर किए। इसी 200 रुपए के ट्रांजेक्शन के जरिए साइबर टीम ने असम के बारपेटा जिले के सांचुका गांव के रहने वाले रफिकुल आलम को ट्रेस किया।
16 अगस्त को उसे गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात लाया गया। उस पर CID क्राइम ब्रांच में 3 FIR दर्ज की गई हैं, जबकि अन्य राज्यों से भी 5 शिकायतें सामने आई हैं।

आरोपी के अकाउंट में 50 लाख मिले
अकाउंट की जांच से पता चला कि इसमें अन्य पीड़ितों के 50 लाख रुपए पहले ही जमा हो चुके थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 8 अलग-अलग लोकेशन जामनगर, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, रायपुर और ओडिशा के सुंदरगढ़ और भुवनेश्वर पर अपनी टीमें भेजी।
पुलिस ने इन जगहों पर पहुंचकर करोड़ों रुपए के फ्रॉड को रोका। एक पीड़ित फर्जी 'टेरर-फंडिंग' केस से बचने के लिए 10 लाख दे चुका था और 20 लाख और देने के लिए अपनी दुकान तक बेच दी थी। एक व्यक्ति फेक इन्वेस्टमेंट स्कैम में 9.5 लाख रुपये गंवा चुका था और पुलिस के दखल से ठीक पहले 10 लाख रुपए और भेजने की तैयारी में था।

1 हजार करोड़ का ट्रांजेक्शन
SP भेडा ने बताया, इस काले धन को ठिकाने लगाने के लिए 1,754 अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया। 1,090 साइबर क्राइम के मामलों में कुल 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक का लेन-देन हुआ।
ट्रैकिंग से बचने के लिए ठग कुछ ही सेकंड में 3,000-3,000 रुपए के हिस्सों में पैसे अलग-अलग खातों में भेज देते थे। जांच में 23 क्रिप्टो वॉलेट्स का भी पता चला है, जिनमें करीब 16 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

China Ma'am 4 के नाम नंबर मिला
आरोपी के फोन में एक संदिग्ध नंबर China Ma'am 4 के नाम से सेव मिला है। पुलिस को शक है कि ठगी का पैसा चीन भेजा जा रहा था और यह पूरा नेक्सस कंबोडिया से ऑपरेट किया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के बाकी गुर्गों की तलाश में जुटी हुई है और माना जा रहा है कि यह इस महाघोटाले का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है।

