Explainer- ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर क्यों मचा बवाल: सोनिया बोलीं- ट्राइबल राइट्स के खिलाफ; केंद्र का दावा- चीन के लिए दीवार साबित होगा
Published:
5 min read

भारत ने निकोबार द्वीप समूह में स्ट्रेजिक डिफेंस सुरक्षा बढ़ा दिया है। इसमें कैम्पबेल खाड़ी में INS बाज के रनवे का विस्तार भी शामिल है।
केंद्र सरकार ग्रेट निकोबार में 72,000 करोड़ के एक प्रोजेक्ट पर बड़ा दांव लगा रही है। निकोबार प्रोजेक्ट भारत के दक्षिणी सिरे से 9 किमी दूर, इंडोनेशिया का आचे प्रोविन्स से 210 किमी और मल्लका स्ट्रेट से 900 किमी दूर है। यह 166 स्क्वायर किमी एरिया में बनेगा। इसी क्षेत्र में 300 शोम्पेन और निकोबारी ट्राइब्स रहती हैं।
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार के इस बड़े प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए हैं। सोनिया ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को प्लान्ड मिस एडवेंचर बताया है। सोनिया की दलील है कि इससे ट्राइबल राइट्स और एनवायरमेंट को नुकसान होगा।
आइए जानते हैं ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है, और भारत के लिए इस प्रोजेक्ट के क्या मायने हैं?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एक लार्ज स्केल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट प्लान प्रोजेक्ट है। केंद्र सरकार बंगाल की खाड़ी में ग्रेट निकोबार आईलैंड के दक्षिण में अंडमान-निकोबार के ग्रुप आईलैंड में इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस मल्टी-बिलियन-डॉलर के स्ट्रैजिक और इंफ्रास्ट्रक्चरल प्लान में पोर्ट, एयरपोर्ट, पावर और डाउनशिप जैसी अहम फैसेलिटीज होंगी। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की समुद्री सुरक्षा और ट्रेड के लिए बूस्टर डोज साबित हो सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी एनवॉयरमेंट क्लियरेंस कुछ शर्तों के साथ 2022 में मिल चुका है। प्रोजेक्ट की टोटल कॉस्ट 81,000 करोड़ रुपए के करीब हो सकती है।
NITI आयोग के नेतृत्व में अंडमान निकोबार आईलैंड इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (ANIIDCO) इस प्रोजेक्ट को डेवलप करेगा। प्रोजेक्ट का मसकद ग्रेट निकोबार को स्ट्रैजिक हब, इकोनॉमिक और टूरिज्म हब के तौर पर डेवलप करना है।
जानिए क्या-क्या बनेगा?
इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT)-
गैलाथिया की खाड़ी में एक गहरा पोर्ट बनाया जाएगा। इसकी क्षमता 16 मिलियन TEUs (20 फुट के करीब एक यूनिट) रहेगी। यह रूट दुनिया के मोस्ट बिजी शिपिंग लेन में से एक है। इसलिए यह प्रोजेक्ट एक स्पेशल लोकेशन बनाएगा।
ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट-
डिफेंस और सिविलियन के लिए एक एयरपोर्ट बनाया जाएगा। इसकी क्षमता 2050 तक 4,000 पैसेंजर प्रति घंटे होने की उम्मीद है।
टाउनशिप डेवलपमेंट-
3-4 से लाख लोगों के लिए एक सिटी प्लान की गई है। इस सिटी में रेसिडेंशियल, कमर्शियल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट बनाए जाएंगे।
पावर प्लांट और इंफ्रास्ट्रक्चर-
एक 450 MVA का गैस और सोलर बेस्ड पावर प्लांट रोड के साइड में बनाया जाएगा। इसमें पानी सप्लाई और सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा होगी।
स्ट्रेजिक सिग्नफिकेंस और नेशनल सिक्योरिटी
1. मलक्का स्ट्रेट के पास स्ट्रेजिक लोकेशन
ग्रेट निकोबार 6डिग्री चैनल के पास स्थित है। ये मलक्का जल डमरूमध्य के पास एक अहम रूट है। इसी रूट से चीन का 30-40% ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी एक्सचेंज होता है। ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और एयरपोर्ट के बनने से भारत इस रूट को आसानी से मॉनिटर और सिक्योरिटी कवर में तब्दील कर सकता है। इससे भारत हिंद महासागर में चीन को कंट्रोल कर सकेगा। खासकर बीजिंग की "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के खिलाफ।
2. मिलिट्री और नेवल एडवांटेज
इस प्रोजेक्ट में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और डिफेंस यूज भी होगा। इससे अंडमान और निकोबार में भारत की एकमात्र ट्राय सर्विस कमांड नौसेना और वायु सेना की रैपिड डिप्लॉयमेंट (फौरन या जल्द तैनाती) मुमकिन हो सकेगी।
इससे अंडमान निकोबार द्वीप समूह के आसपास और बंगाल की खाड़ी में भारत की निगरानी बढ़ेगी। साथ ही भारत को स्पेशल पावर मिलेगी। प्रमुख समुद्री क्षेत्र जहां बाहरी शक्तियां काम करती हैं।
3. चीनी विस्तार पर फोकस
चीन ने म्यांमार के क्याउकप्यू, श्रीलंका के हंबनटोटा और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर भारी इन्वेस्टमेंट किया है। भारत का विश्व स्तरीय ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट देश के लॉजिस्टिस हब को बढ़ावा देने में इंडो पेसिफिक रीजन में बढ़ा किरदार अदा करेगा। साथ ही इस क्षेत्र में जियोपॉलिटकल और डिफेंस के मामले में भी हमें काफी फायदा होगा।
4. मेरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA)
पोर्ट और सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से भारत शिपिंग लेन को ट्रैक, मॉनिटर और कंट्रोल कर सकेगा। यह प्रोजेक्ट भारत की Quad सिक्योरिटी इनिशिएटिव (US, जापान, और ऑस्ट्रेलिया) के बीच भूमिका को मजबूत करेगा। इससे इस इंडो पैसिफिक कॉरिडोर में भारत फ्री और ओपन नेविगेशन मिलेगा।
5. डिजास्टर रिस्पॉन्स और रीजनल सिक्योरिटी
2004 में आई सुनामी ने बताया कि यह इलाका कितना मुश्किल है। मॉडर्न पोर्ट और एयरपोर्ट बनने से ग्रेट निकोबार को फौरन मदद पहुंचाई जा सकेगी। हमारा डिजॉस्टर रिस्पॉन्स बहुत बेहतर हो जाएगा। इसका सीधा फायदा यहां के लोगों को मिलेगा।
प्रोजेक्ट पर क्यों उठ रहे सवाल
इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणीय, सोशल समस्याएं के साथ विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है।
इकोलॉजिकल इम्पेक्ट
विपक्षी नेताओं ने बड़े पैमाने पर जंगल कटाई (8 लाख से अधिक पेड़) और दुर्लभ प्रजातियों (जैसे निकोबार मेगापोड और लेदरबैक कछुए) के खत्म होने का खतरा बताया है। कांग्रेस सांसद जयराम नरेश ने कहा- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय दावा कर रहा है कि 8.5 लाख पेड़ काटे जाएंगे। हालांकि 32 से 58 लाख पेड़ काटे जाने की आशंका है।
इंडिजिनियस कम्युनिटी
ग्रेट निकोबार में शोम्पेन और निकोबारी ट्राइब्स रहते हैं। ये विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय ग्रुप (PVTG) हैं। इनके विस्थापन को लेकर चिंता जताई जा रही है।।
भूकंप का खतरा
ग्रेट निकोबार हाई रिस्क अर्थक्वैक और सुनामी जोन में आता है। 2004 में यहां पर सुनामी आई थी। रमेश ने पिछले साल कहा था कि हाई रिस्क वाले भूकंपीय क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रचर बनाना किसी प्राकृतिक आपदा को न्योता देने जैसा है।

