प्रज्वल रेवन्ना को उम्रकैद: नौकरानी से रेप के मामले में पूर्व PM देवगौड़ा के पोते को सजा; 10 लाख रुपए जुर्माना भी
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1 अगस्त को दोषी ठहराए जाने के बाद रेवन्ना ने कहा था- मैं सियासत में बहुत तेजी से आगे बढ़ा। इसलिए मुझे साजिश का शिकार बनाया गया। (फाइल)
JDS से निष्कासित पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को रेप के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। रेवन्ना पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते हैं।
28 अप्रैल से 10 जून 2024 के बीच प्रज्जवल के खिलाफ कुल 4 FIR दर्ज की गई थीं। इनमें से एक उनकी नौकरानी ने दर्ज कराया था। नौकरानी ने रेवन्ना पर फार्म हाउस और घर में दो बार रेप करने और उसका वीडियो बनाने का आरोप लगाया था। इसी मामले में स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार (1 अगस्त) को दोषी ठहराया था।
दोषी ठहराने जाने पर क्या बोले रेवन्ना
दोषी ठहराए जाने के बाद प्रज्वल का बयान सामने आया था। उसका कहना है कि मैंने कुछ नहीं किया, मेरी गलती सिर्फ इतनी है कि राजनीति में बहुत जल्दी और तेजी से आगे बढ़ा। मुझ पर आरोप लगाया गया कि मैंने कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया, लेकिन शिकायत करने के लिए कोई भी महिला अपनी मर्जी से सामने नहीं आई। चुनाव से 6 दिन पहले उन्हें सामने लेकर आए और उनसे शिकायत दर्ज करवाई गई।
नौकरानी से रेप के मामले में दोषी करार
ये मामला 48 साल की हाउस हेल्प यानी नौकरानी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। महिला ने रेवन्ना के खिलाफ रेप और बंधक बनाने के आरोप लगाए थे। पहली घटना 2021 में लॉकडाउन के दौरान हुई।
पीड़िता की शिकायत के मुताबिक, रेवन्ना ने होलेनरसीपुरा, बेंगलुरु और होलेनरसीपुरा में गन्निकाडा के फार्महाउस में अलग-अलग जगह रेप किया था। चार्जशीट के मुताबिक, पीड़िता शुरू में चुप रही, क्योंकि रेवन्ना ने कथित तौर पर उसके साथ संबंध बनाने के वीडियो रिकॉर्ड किए और उन्हें वायरल करने की धमकी दी। बाद में पीड़िता ने जॉब छोड़ दी।
2000 पन्नों की चार्जशीट, 23 गवाहों के बयान हुए दर्ज
इंस्पेक्टर शोभा के नेतृत्व में सीआईडी की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने इस मामले में जांच की थी। रेवन्ना के खिलाफ जांच टीम ने 2000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। 31 दिसंबर 2024 को मामले में ट्रायल शुरू हुआ था। कोर्ट ने 7 महीनों में 23 गवाहों के बयान दर्ज किए।
वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट और क्राइम सीन रिपोर्ट देखी। रेवन्ना को कोर्ट ने आईपीसी की 376(2)(k) और 376(2)(n) के तहत दोषी ठहराया गया। इसमें 10 साल से आजीवन सजा का प्रावधान है। इसके अलावा आईपीसी सेक्शन 354(A), 354(B), और 354(C), 506, 201 और आईटी एक्ट 2008 के सेक्शन 66E के तहत दोषी ठहराया गया है।

