नक्सली कमांडर अब यूनिवर्सिटी कोऑर्डिनेटर: भूपति पर 6 करोड़ का इनाम था, सरेंडर करते ही लाइफ बदली: अब आदिवासियों के लिए अलग तरह से काम करेंगे
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भूपति CPI-Maoist के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के मेंबर थे। उन्हें संगठन के सबसे असरदार रणनीतिकारों में गिना जाता था। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे इलाकों में माओवादी गतिविधियों की निगरानी में उनकी बड़ी भूमिका थी।
नेशनल डेस्क। कभी बंदूक के दम पर माओवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले मालोजुला वेणुगोपाल राव (भूपति) अब आदिवासियों के अधिकारों के लिए अलग अंदाज में काम करेंगे। उन्हें महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में गोंडवाना यूनिवर्सिटी के एक प्रोग्राम में कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई है।
भूपति को यूनिवर्सिटी के 'एकल' प्रोग्राम के लिए तीन महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर अपॉइंट किया गया है। उन्हें हर महीने 30 हजार रुपए सैलरी मिलेगी। उनका काम आदिवासी गांवों, ग्राम सभाओं और प्रशासन के बीच तालमेल बनाने का होगा।
भूपति वही शख्स हैं, जिन पर एक वक्त 6 करोड़ का इनाम था। पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने अपने 60 साथियों के साथ पुलिस के सामने हथियार डाले थे। इसी के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।
बंदूक छोड़ी, अब अधिकारों की लड़ाई दूसरे एंगल से
गढ़चिरौली के SP एम. रमेश के मुताबिक, भूपति अपने जमीनी अनुभव और इलाके की जानकारी के आधार पर नौकरी चाहते थे। उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया। उनका आवेदन गोंडवाना यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर (VC) को भेजा गया। इंटरव्यू के बाद उन्हें नौकरी मिल गई।
यूनिवर्सिटी के VC प्रशांत बोकारे ने भी भूपति के अपॉइंटमेंट की पुष्टि की। बोकारे ने बताया कि भूपति अब गढ़चिरौली के ट्राइबल रिसर्च सेंटर में काम करेंगे और एकल प्रोग्राम से जुड़े कामों में मदद करेंगे।
यानी पहले आदिवासियों के हक की लड़ाई बंदूक के दम पर लड़ने का समर्थन करने वाले भूपति अब यह लड़ाई आदिवासियों की आवाज प्रशासन और प्रशासन की आवाज आदिवासियों तक पहुंचाने के जरिए जारी रखेंगे।

ग्राम सभाओं को बताएंगे PESA और वन अधिकार कानून
'एकल' प्रोग्राम के तहत भूपति को आदिवासी गांवों में ग्राम सभाओं के साथ काम करना होगा। वह लोगों को PESA (पंचायत एक्सटेंशन ऑफ शेड्यूल एरिया) एक्ट और वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) के तहत मिलने वाले अधिकारों की जानकारी देगा। इसके अलावा उसकी जिम्मेदारियों में:
- वन अधिकार के दावों के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार कराने में मदद करना।
- दावों में हुई गलतियों को ठीक करवाना।
- दावों को प्रशासन तक पहुंचाने में तालमेल करना।
- ग्राम सभा, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संपर्क बनाना।
- जिले में सरकारी योजनाओं की निगरानी में मदद करना।
यानी, जिस भूपति की पहचान कभी जंगल में हथियारबंद माओवादी कमांडर के तौर पर थी, अब वही आदिवासियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रशासन और गांवों के बीच पुल का काम करेंगे।
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