बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: SC ने पूछा- आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट में क्यों शामिल नहीं किया
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवारी को बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। (फाइल)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। याचिका एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(ADR) नाम के एक NGO की ओर से दायर की गई थी। याचिका में SIR के लिए वैध दस्तावेजों में बदलाव करने की मांग की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस पीटिशन पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि आधार कार्ड, वोटर आइडी कार्ड और राशन कार्ड को मतदाता पहचान पत्र की लिस्ट में क्यों नहीं शामिल किया गया है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करने पर रोक नहीं
हालांकि, कोर्ट ने यह कहते हुए मतदाता सूची का मसौदा जारी करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया कि इसे लेकर कोर्ट अंतरिम राहत नहीं मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश होने से पहले इस पर सुनवाई होगी। मामले में अंतिम सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
वोटर लिस्ट संसोधन के लिए 11 डॉक्यूमेंट जरूरी
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने 24 जून को वोटर लिस्ट संशोधन( SIR) प्रक्रिया की घोषणा की थी। चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदाता सूची में अपडेट करने के लिए 11 डॉक्यूमेंट को मान्यता दी गई है। वोटर्स इनमें से किसी भी एक दास्तावेज के जरिए वोटर लिस्ट में संशोधन करवा सकते हैं। हालांकि, इसमें आधार कार्ड, वोटर आइडी कार्ड और राशन कार्ड शामिल नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में मतदाता अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं करवा पा रहे हैं।
ऐसा हुआ तो पूरी SIR प्रक्रिया पर राेक लगा देंगे: कोर्ट
PTI के मुताबिक, दो जजों की बेंच सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश से सहमत नजर आए जिसमें आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को पहचान के साक्ष्य के तौर पर वैध दस्तावेज माना जा सकता है। चुनाव आयोग ने भी जवाबी हलफनामे में आधार, वोटर आईडी कार्ड और राशन कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट मानने का जिक्र किया था। कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश हुए सीनियर वकील राकेश द्विवेदी से कहा कि अगर वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम शामिल करने या हटाने का मामला सामने आता है तो कोर्ट पूरी SIR प्रक्रिया पर रोक लगा सकता है।
आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड वैलिड डॉक्यूमेंट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राशन कार्ड की नकल की जा सकती है। हालांकि, आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की प्रमाणिकता होती है। ऐसे में इन्हें वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आधिकारिक दस्तावेजों के सही होने को लेकर कई अवधारणाएं हैं। हालांकि, आप इन दो दस्तावेजों ( आधार और वोटर आईडी कार्ड) के साथ आगे बढ़ सकते हैं। फर्जीवाड़ा होेने का मामला अलग-अलग केस पर निर्भर करता है। वैसे तो दुनिया का कोई भी दस्तावेज फर्जी बनाया जा सकता है।
7.24 करोड़ से ज्यादा वोटर्स SIR में शामिल हुए
चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार के 7.89 करोड़ वोटर्स में से 7.24 करोड़ से ज्यादा वोटर्स ने SIR में भाग लिया, यानी लगभग 92% मतदान हुआ। हालांकि, कई हलफनामों और फील्ड रिपोर्ट में इस आंकड़े को चुनौती दी गई है। जिसमें कहा गया है कि वोटर्स की सहमति के बिना BLO कि ओर से फॉर्म अपलोड किए गए थे। एडीआर और दूसरे याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मृत लोगों की भी फॉर्म जमा किए गए थे।
1 सितंबर तक दर्ज कराई जा सकती है आपत्ति
चुनाव आयोग के मुताबिक, बिना स्पीकिंग ऑर्डर और सूचना के किसी भी नाम को हटाया नहीं जाएगा। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 1 अगस्त को प्रकाशित की जाएंगी और मतदाता या राजनीतिक दल 1 सितंबर तक दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डीएम या मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की जा सकती है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई तक इलेक्शन कमीशन को अपना जवाब सौंपने को कहा है।

