कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था: दिल्ली में इंटरनेट-मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलील
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10 अक्टूबर के प्रदर्शन के मद्देनजर CRPF की 221 कंपनियों की तैनात थी। इसके अलावा 5 महिला अर्धसैनिक कंपनियां भी मौजूद थी। (फोटो-ANI)
नेशनल डेस्क. दिल्ली में CJP के प्रोटेस्ट (9-10 अक्टूबर) को लेकर मोबाइल इंटरनेट और मेट्रो स्टेशन बंद करने के फैसले का केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया।
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर एफिडेविट में कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था। इस बात से भी इनकार किया है कि उसने जानबूझकर कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की है।
दरअसल, 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने के आदेश पर चिंता जताई थी और कहा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं। कोर्ट ने कहा- जो लोग मेट्रो से ही चलते हैं, उनके बारे में सोचना होगा। इसके बाद कोर्ट के निर्देशों का पालन न किए जाने का आरोप लगाते हुए एक अवमानना याचिका दायर की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
11 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के चेयरपर्सन डी थारा को नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में एफिडेविट दिया गया है।
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने बचाव में क्या कहा
केंद्र सरकार के एफिडेविट में कहा गया है, मोबाइल इंटरनेट सर्विस पर अस्थायी रोक का निर्णय दिल्ली पुलिस के निवेदन पर किया गया था। पुलिस को प्रदर्शन के दौरान लॉ एंड ऑर्डर के बिगड़ने की आशंका थी। केंद्र ने कहा- इंटरनेट केवल 9 अक्टूबर को रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक किया गया था। इंटरनेट के रोक की लिमिट रायसीना हिल से 4 किमी के एरिया तक थी। एफिटेविट में दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हुई घटना का भी जिक्र किया।

'निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं'
एफिडेविट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया। साथ ही केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ शुरू की गई अवमानना की कार्यवाही से राहत की मांग की गई। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने डिटेन करने आईं, बसों को डैमेज किया। उनके टायर पंचर कर दिए।
CJP ने प्रदर्शन के लिए आवेदन नहीं दिया
दिल्ली पुलिस ने कहा- CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए सिर्फ सूचना दी थी। CJP ने प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए आवेदन नहीं दिया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दिल्ली में 303 मेट्रो स्टेशन हैं। सिर्फ 15% मेट्रो नेटवर्क पर ही रोक लगाई गई थी।

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प्रोटेस्ट के चलते मेट्रो स्टेशन बंद थे
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रोटेस्ट रखा था। दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। प्रोटेस्ट के मद्देनजर दिल्ली के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया। इसके अलावा नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन आने वाली सभी ट्रेनों को भी 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक रद्द कर दिया गया था।

