भारत का चीन को दो टूक जवाब: किरेन रिजिजू ने कहा- दलाई लामा का उत्तराधिकारी वह खुद तय करेंगे, कोई और नहीं
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भारत ने दलाई लामा को लेकर चीन को दो टूक जवाब दिया है।
भारत सरकार ने दलाई लामा को लेकर पहली बार साफ शब्दों में चीन को जवाब दिया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का फैसला केवल खुद दलाई लामा ही कर सकते हैं। रिजिजू ने कहा कि यह मामला पूरी तरह धार्मिक परंपरा और उनके अनुयायियों की आस्था से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा पूरी दुनिया के करोड़ों बौद्धों के लिए एक आध्यात्मिक प्रतीक हैं। उनके उत्तराधिकारी के चयन पर कोई बाहरी ताकत या सरकार फैसला नहीं ले सकती। यह केवल उनकी मर्जी और स्थापित परंपराओं के आधार पर होगा
चीन बोला-उत्तराधिकारी पर आखिरी मुहर बीजिंग की होगी
भारत के इस बयान से पहले चीन ने कहा था कि दलाई लामा, पंचेन लामा और अन्य बड़े बौद्ध नेताओं की पुनर्जन्म प्रक्रिया चीन सरकार की मंजूरी से ही पूरी होगी। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने AFP से कहा कि इन पदों के उत्तराधिकारी का चयन गोल्डन अर्न नामक पारंपरिक चीनी प्रक्रिया से होगा। इसे चीन के केंद्र सरकार की मंजूरी हासिल करनी होगी। चीन लम्बे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि तिब्बत और उसके धार्मिक संस्थानों पर उसका नियंत्रण वैध है। भारत का यह बयान उसी के खिलाफ सख्त जवाब माना जा रहा है।
परंपरा और आस्था की रक्षा के लिए खड़ा रहेगा भारत
रिजिजू, जो खुद बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, ने साफ किया कि भारत न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन करता है, बल्कि परंपरा और आस्था की रक्षा में भी खड़ा है। उन्होंने कहा कि दलाई लामा और गदेन फोद्रांग ट्रस्ट ही तय करेंगे कि अगला अवतार कौन होगा। इस विषय में कोई बाहरी दखल मान्य नहीं होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दलाई लामा ने खुद कहा कि उनके संस्थान का अस्तित्व जारी रहेगा और गदेन फोद्रांग ट्रस्ट को उनके पुनर्जन्म की पहचान करने का अधिकार है।
तिब्बत काे लेकर विस्तारवादी रुख अपनाता रहा है चीन
यह बयान केवल धार्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। चीन तिब्बत को लेकर लगातार विस्तारवादी रुख अपनाता रहा है। भारत-चीन सीमा विवाद के बीच दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने नजर आ रहे हैं। भारत ने इस मामले में पहली बार आधिकारिक रूप से चीन की दखलअंदाज़ी को ठुकराया है। इससे पहले चीन ने 11वें पंचेन लामा की पहचान खुद तय की थी, जिसे तिब्बती समाज और दलाई लामा ने कभी स्वीकार नहीं किया। भारत अब ऐसी गलती दोहराने को तैयार नहीं है।
6 जुलाई को है दलाई लामा का 90वां जन्मदिन
6 जुलाई को दलाई लामा का 90वां जन्मदिन है, जिसे धर्मशाला में बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। इसमें किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह शामिल होंगे। यह उपस्थिति दर्शाती है कि भारत दलाई लामा और तिब्बती समुदाय के साथ अपनी निकटता को खुले तौर पर दिखाना चाहता है। यह भी संकेत है कि भारत अब चीन के दबाव में नहीं आने वाला, खासकर धार्मिक-आध्यात्मिक मामलों में। दलाई लामा, खासकर नालंदा परंपरा के अनुयायियों के लिए सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व हैं।

