सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने: INDIA अलायंस के सुदर्शन रेड्डी को 152 वोट से हराया; क्या ओडिशा की तरह तमिलनाडु में भी सफल होगी BJP की रणनीति
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NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की।
नेशनल डेस्क। NDA उम्मीेदवार सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की। उन्हें 452 वोट मिले। जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। सीपी राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति होंगे। हालांकि, राधाकृष्णन वोट के लिहाज से पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए। धनखड़ को 74.4 प्रतिशत वोट मिले थे।
मानसून सत्र में जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। इसके बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया था। जबकि विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उनके खिलाफ उतारा था। सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, ऐसे में उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाने के पीछे BJP की सधी हुई रणनीति मानी जा रही है।
तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BJP राधाकृष्णन के सहारे राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। BJP ओडिशा की तरह ही तमिलनाडु में भी इसी रणनीति के तहत सफलता पाना चाह रही है।

क्या हुआ था ओडिशा में
इससे पहले बीजेपी ने 2022 राष्ट्रपति चुनाव में ओडिशा से आदिवासी चेहरा द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया था। मुर्मू चुनाव जीतकर देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनीं। 2 साल बाद 2024 लोकसभा चुनाव और उसके साथ हुए ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा मिला। बीजेपी पहली बार पूर्व बहुमत से अकेले दम पर राज्य की सत्ता तक पहुंचने में सफल रही। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में आदिवासियों ने खुलकर बीजेपी को वोट किया और यही वजह रही कि लोकसभा की 21 में से 20 पर बीजेपी को जीत मिली।
वहीं, विधानसभा में भी बीजेपी 147 में से 78 सीटें जीतने में सफल रही। जबकि इससे पहले देशभर में मोदी लहर के बावजूद ओडिशा में बीजेपी को 2019 में 23 और 2014 में 10 सीटें मिली थीं।
क्या तमिलनाडु में सफल होगा ओडिशा फॉर्मूला
बीजेपी लंबे वक्त से दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है। यहां 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 23 सीट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन खाता भी नहीं खोल सकी। तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा भी हैं। ऐसे में राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद तक पहुंचाकर बीजेपी वहां के लोगों को एक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं। उनका जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तिरुप्पुर जिले में हुआ था। वे 16 साल की उम्र में ही RSS से जुड़ गए थे। इसके बाद बीजेपी जॉइन कर लिया। 1998 और 1999 में तमिलनाडु की कोयंबटूर सीट से सांसद बने।

राधाकृष्णन 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। फिर 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने। इसके बाद जुलाई 2024 में महाराष्ट्र के गर्वनर बने। उन्होंने कुछ समय के लिए अन्य राज्यों में भी राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभाला।
मां ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन से प्रेरित होकर रखा था नाम
अगर वे चुने जाते हैं तो सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बाद इसी सरनेम के दूसरे उपराष्ट्रपति होंगे। इंटेरस्टिंग फैक्ट ये भी है कि सीपी राधाकृष्णन का नाम उनकी मां ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से इंस्पायर होकर ही रखा था।
उपराष्ट्रपति चुनाव में 3 बड़ी जीत
⦁ उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत केआर नारायणन के नाम दर्ज है। 1992 में उनके सामने निर्दलीय काका जोगिंदर सिंह उतरे थे। 790 सांसदों में 711 ने वोट डाला था। इनमें से 10 वोट अमान्य घोषित हो गए। जोगिंदर को सिर्फ 1 वोट मिला, जबकि केआर नारायणन को 700 वोट मिले।
⦁ दूसरी बड़ी जीत निर्दलीय उम्मीदवार जाकिर हुसैन के नाम है। 1962 के चुनाव में जाकिर हुसैन को 97.59 फीसदी यानी 568 वोट मिले, जबकि सामंतसिंहार को मात्र 14 वोट मिले।
⦁ 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ को 74.37% यानी 528 वोट मिले। जबकि उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे विपक्ष के उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 25.63% यानी 182 वोट मिले थे।

