संविधान की प्रस्तावना में बदलाव का मुद्दा: उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले- बदलाव नहीं कर सकते, लेकिन इमरजेंसी के वक्त ऐसा हो चुका है
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जगदीप धनखड़- भारत के उपराष्ट्रपति
संविधान से धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी जैसे टर्म हटाने को लेकर उपजी बहस में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी कूद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में बदलाव नहीं किया जा सकता, लेकिन इमरजेंसी के वक्त इसमें जरूर परिवर्तन हुआ था। उस वक्त संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता सहित तीन टर्म जोड़े गए थे।
बता दें, इमरजेंसी को 50 साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान RSS के जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष जैसे शब्द हटा देने चाहिए। होसबोले के इस स्टेटमेंट ने विवाद को जन्म दे दिया। विपक्षियों ने RSS और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा।
‘संविधान की प्रस्तावना में बदलाव करने वाला भारत एकमात्र देश’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जगदीप धनखड़ शनिवार को एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘प्रस्तावना वो बीज है, जिससे संविधान फलता-फूलता है। इसे बदला नहीं जा सकता। हालांकि, इमरजेंसी के वक्त 1976 में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता जैसे टर्म जोड़ दिए गए। सवाल यह है कि बाबा साहब ने संविधान तैयार करते वक्त क्या इन बिंदुओं पर सोचा नहीं होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां संविधान की प्रस्तावना में बदलाव किया गया है।

समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने पर जोर
दत्तात्रेय होसबोले ने हाल ही में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी (Socialist) और धर्मनिरपेक्ष (Secular) जैसे शब्दों को 1976 में जबरन जोड़ा गया था। जब बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान बनाया था, तब ये दोनों शब्द प्रस्तावना में नहीं थे। होसबोले का कहना है कि अब समय आ गया है कि इन्हें प्रस्तावना से हटाने पर विचार किया जाए।
राहुल बोले- RSS-बीजेपी गरीबों का अधिकार छीनना चाहती है
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने होसबोले के बयान पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि RSS और बीजेपी को संविधान से दिक्कत है क्योंकि वह समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। राहुल ने आरोप लगाया कि RSS और बीजेपी बहुजनों और गरीबों के अधिकार छीनकर उन्हें फिर से गुलाम बनाना चाहते हैं।

