CWC के प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: SIR प्रोसेस रोकने और डिलीट वोटरों को फिर से जोड़ने पर भी जोर; खड़गे बोले- कठपुतली बन गए CEC
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कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के काम करने के तरीके के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ। इस प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ ही कई मांग रखी गई। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने मंगलवार (29 सितंबर) को कांग्रेस हेडक्वार्टर में हुई बैठक में तय किया कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़ी रहेगी। पार्टी ने SIR प्रोसेस को फौरन रोकने और इस दौरान हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को वोटर लिस्ट में वापस जोड़ने की बात को भी प्रस्तवा में शामिल किया।
कांग्रेस ने इस बैठक में पास हुए प्रस्ताव में चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
कांग्रेस बोली- 'वोट चोरी' का आयोजन CEC ने किया
CWC के प्रस्ताव में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी' CEC की ओर से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए आयोजित की गई। पार्टी ने कहा कि CEC ने अपनी नैतिक और संस्थागत विश्वसनीयता खो दी है।
कांग्रेस ने SIR को लेकर कहा कि इस प्रोसेस में लोगों पर अपनी नागरिकता और वोट देने की पात्रता साबित करने का बोझ डाला जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं।
कांग्रेस ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और वयस्क मताधिकार के अधिकार से जोड़ते हुए सवाल उठाया। कांग्रेस ने कहा कि SIR के दौरान 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं। पार्टी ने इन सभी नामों को तुरंत बहाल करने की मांग की है।

दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों का मुद्दा उठा
कांग्रेस ने CWC में उन रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से 10 महीने में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज करने की बात सामने आई थी।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने वोटर जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव, वोटर डेटा के मैनेजमेंट और SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रोसेस पर सवाल उठते हैं। हालांकि चुनाव आयोग इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर सफाई दे चुका है। आयोग का कहना है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मुद्दों पर सवाल और सुझाव जरूर दिए थे, लेकिन इन्हें अंतिम फैसलों से असहमति नहीं माना जा सकता।
खड़गे ने CEC को 'मोदी सरकार की कठपुतली' बताया
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ऐसा चुनाव आयोग चाहती है जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों भरोसा कर सकें। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SIR का फैसला किसने लिया और दोनों चुनाव आयुक्तों को इंटरनल पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया था। खड़गे ने बैठक में पार्टी की पांच प्रमुख मांगें भी रखीं...
- वोटर लिस्ट में हुए हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
- जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इसकी जानकारी दी जाए और उन्हें अपील का पूरा मौका मिले।
- राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट और जरूरी डेटा समय पर और आसान फॉर्मेट में दिया जाए।
- गंभीर गड़बड़ी मिलने पर स्वतंत्र और तय समय में जांच हो।
- चुनाव प्रक्रिया से जुड़े जरूरी डेटा और फैसलों में ज्यादा पारदर्शिता हो।
खड़गे का कहना है कि ये कदम 2027 में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले जरूरी हैं, ताकि किसी वोटर के अधिकार पर असर न पड़े और चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे।

अब मुद्दा संसद, कोर्ट और सड़क तक ले जाने की तैयारी
CWC ने कहा कि कांग्रेस SIR और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे को संसद, अदालत और सड़कों पर उठाती रहेगी। पार्टी पहले ही 'वोट चोरी' अभियान, बिहार में 'वोट अधिकार यात्रा' और अलग-अलग राज्यों में वोटर लिस्ट से जुड़ी शिकायतों को लेकर अभियान चला चुकी है। यानी सड़कों पर यह आंदोलन फैल चुका है। देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता बीते तीन दिनों से इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं।
कांग्रेस इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में भी ले जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR को चुनौती देने वाली एक याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने की सहमति दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।
उधर, संसद में भी कांग्रेस CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट है कि कांग्रेस ने इसके लिए सभी विपक्षी दल को राजी कर लिया है और अगले एक से दो हफ्ते में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया जा सकता है।
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