CJP अब ‘क्या बोलती पब्लिक’ कैंपेन शुरू करेगी: जानेंगे देश के लोग किन बातों से परेशान; पहला मुद्दा स्कूल-कॉलेज की महंगी फीस
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महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में CJP की कोर टीम की दो दिनों तक चली बैठक के बाद आगे की रणनीति तैयार की गई है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने देशभर में 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से नया कैंपेन शुरू करने का ऐलान किया। उनका कहना है कि इस अभियान का मकसद लोगों के बीच जाकर उनकी असली समस्याएं समझना और उन्हें सुलझाने के लिए सरकार पर दबाव बनाना है।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में CJP की कोर टीम की बैठक खत्म होने के बाद दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि कैंपेन का पहला बड़ा मुद्दा शिक्षा होगा क्योंकि आज अच्छी पढ़ाई आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
'पहली क्लास की फीस ही 1-2 लाख रुपये'
दीपके ने कहा कि आज कई स्कूलों में पहली कक्षा की सालाना फीस 1 से 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा अलग से डोनेशन भी देना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि मध्यम वर्ग और गरीब परिवार इतने पैसे आखिर कहां से लाए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ स्कूल ही नहीं, कॉलेज और कोचिंग की फीस भी लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह से कई परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। CJP चाहती है कि माता-पिता पर बच्चों की शिक्षा का बोझ कम हो और हर बच्चे को बिना फाइनेंशियल प्रॉब्लम के बिना पढ़ाई का मौका मिले।
'शिक्षा अधिकार नहीं, कारोबार बन गई'
दीपके ने डॉ. भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह अधिकार धीरे-धीरे एक कारोबार बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के नाम पर लोगों से भारी रकम वसूली जा रही है।
'लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कम हो रहा'
दीपके ने कहा कि हाल में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को सिर्फ NEET या शिक्षा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वहां लोगों का गुस्सा पूरे सिस्टम के खिलाफ दिखाई दिया।
उन्होंने दावा किया कि लोगों का भरोसा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कम होता जा रहा है। उनका कहना था कि चुनाव जीतने के बाद कई विधायक-सांसद पार्टी बदल देते हैं, जिससे मतदाताओं का भरोसा टूटता है।
ज्यूडिशियल सिस्टम पर भी सवाल
दीपके ने यह भी दावा किया कि राजनीतिक दलों में टूट या विधायकों के दल बदल से जुड़े मामलों में अदालतें तेजी दिखाती हैं, लेकिन आम लोगों को न्याय के लिए लंबे वक्त तक इंतजार करना पड़ता है। दीपके ने कहा कि इससे अदालतों की निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं।

