CJI की वकील को फटकार: सीजेआई गवई बोले- उन्हें ‘वर्मा’ कैसे कह सकते हैं, वे अभी भी जज हैं, जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका पर सुनवाई
Published:
4 min read

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर बड़ी मात्रा में कैश मिला था।
नेशनल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका में जस्टिस वर्मा के घर से बड़ी मात्रा में कैश निकलने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने जस्टिस यशवंत वर्मा को सिर्फ 'वर्मा' कहने पर वकील को फटकार लगा दी।
वकील मैथ्यूज नेदुम्पारा ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। वकील ने कोर्ट से कहा कि उन्होंने यह याचिका तीसरी बार लगाई है। इस दौरान उन्होंने एक बार जस्टिस वर्मा को सिर्फ ‘वर्मा’ कहकर संबोधित किया।
आप उन्हें ‘वर्मा’ कैसे कह सकते हैं- CJI
इस पर चीफ जस्टिस ने जवाब देते हुए कहा कि अगर आप अभी बर्खास्त करना चाहते हैं, मैं बर्खास्त कर दूंगा। क्या जस्टिस वर्मा तुम्हारे दोस्त हैं? वह अभी भी हाईकोर्ट में जज हैं। आप उन्हें वर्मा कैसे कह सकते हैं? वहीं सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने भी ‘वर्मा’ कहने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वह अभी भी जज हैं।
वकील मैथ्यूज ने FIR दर्ज करने की मांग की
वकील मैथ्यूज नेदुम्पारा की याचिका में जस्टिस वर्मा के खिलाफ दिल्ली पुलिस को FIR दर्ज करने और बरामद नगदी की जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह नोटो की निकवरी एक संज्ञेय अपराध है। जो भ्रष्टाचार और मनी लॉंड्रिंग कानून के तहत दंडनीय है।
तत्कालीन CJI ने दी थी रिपोर्ट
पिछले महीने तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने कमेटी की रिपोर्ट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी। अब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जजों को हटाने का मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पैनल की रिपोर्ट को किया चैलेंज
जज वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है। जस्टिस यशवंत वर्मा ने पूर्व CJI संजीव खन्ना और 3 सदस्यीय पैनल के सजेशन को चैलेंज किया है। उन्होंने कहा कि पैनल ने बिना सुने और निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिए गलत निष्कर्ष दिया है। हाईकोर्ट के जज वर्मा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बेसिक फैक्ट की जांच करने में विफल रही।
क्या है मामला
14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के आवास के स्टोर रूम में आग लगी थी। जहां कथित तौर पर आग से जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। सुप्रीम कोर्ट ने खुद जले हुए नोटों का वीडियो सार्वजनिक किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने एक 3 सदस्यीय जांच पैनल बनाया। बाद नें उन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद के मानसून सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है, जानिए हाईकोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया।
हाईकोर्ट के जज को हटाने और उस पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के आर्टिकल 124 (4) में दी गई है। जज जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरुरी है।
प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत करने के बाद लोकसभा के अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति एक 3 सदस्यीय जांच कमेटी बनाते हैं। कमेटी में CJI, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक न्यायविद होते हैं। यह कमेटी ही आरोप तय करती है। अगर जज दोषी होते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
महाभियोग प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाती है। प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। दोनों सदन में महाभियोग प्रस्ताव पास होने पर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं।

