CJI गवई का बड़ा बयान: SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को सही ठहराया, बोले- अधिकारियों के बच्चों को क्यों मिले रिजर्वेशन का लाभ
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई। (फाइल फोटो)
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई ने आरक्षण पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एससी-एसटी आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' सिद्धांत को लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय के लिए जरूरी बताया।
CJI गवई नागपुर दौरे पर थे। उन्होंने शनिवार को टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, बड़े पदों पर बैठे एससी-एसटी अधिकारियों के बच्चों को वास्तव में वंचित परिवारों के सामान मानना कानून के सकारात्मक पहलू को कमजोर करता है। क्रीमीलेयर व्यवस्था सुनिश्चित करती है आरक्षण का लाभ सबसे योग्य व्यक्ति को मिले।
उनका यह बयान तब आया है, जब सब कैटेगरी को लेकर PIL दायर की गई है, जिसमें कानून में सभी को सामान न्याय देने के लिए SC-ST ग्रुप में सब कैटेगरी की अनुमति दी गई थी।
न्यायपालिका हस्तक्षेप पर बोले गवई
गवई 14 मई, को देश के 52वें CJI नियुक्ति हुए हैं। उन्होंने न्यायपालिका हस्तक्षेप को लेकर चेतावनी दी है। न्यायिक सक्रियता बनी रहेगी, लेकिन इसे न्यायिक दुस्साहस और न्यायिक आतंकवाद नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद कानून बनाती है, कानून को लागू करती है और न्यायपालिका संवैधानिक कानून का पालन सुनिश्चित करती है। हस्तक्षेप से यह संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान एक लीगल दस्तावेज ही नहीं, बल्कि यह एक समाजिक बदलाव का टूल है।
'81 हजार पेंडिग केस कम करना मकसद'
देश के दूसरे दलित और पहले बौद्ध CJI ने रिटायरमेंट के बाद कोई भी पद लेने से इंकार किया है। यह उनके अपनी निजी सिद्धांत हैं। उनका मकसद 81 हजार पेंडिग केस को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद कोर्ट को बुनियादी ढांचे को ठीक करना है।
300 से अधिक जजमेंट दिए
गवई ने 300 से अधिक जजमेंट दिए हैं, इनमें आर्टिकल 370, इलेक्टॉल बॉन्ड्स, नोटबंदी और फ्रीडम ऑफ स्पीच से जुड़े फैसले शामिल हैं। गवई आर्टिकल 370 पर फैसला देने वाली 5 सदस्यी बेंच में भी थे, इस बैंच ने ही आर्टिकल 370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखा था। इस फैसले को उन्होंने अंबेडकर के ‘एक देश एक संविधान’ के विजन के अनुरुप बताया था।

