संविधान ही सर्वोपरि : 'मेरे लिए संविधान सर्वोपरि न कि संसद', चीफ जस्टिस गवई का बड़ा बयान
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चीफ जस्टिस गवई
जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, मेरे लिए देश का संविधान सर्वोच्च है, न कि संसद। जस्टिस गवई ने कहा कि लोकतंत्र की तीनों संस्थाएं (न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका) संविधान के तहत ही काम करती हैं।
जस्टिस बीआर गवई ने 14 मई को सुप्रीम कोर्ट के 52वें चीफ जस्टिस के पद पर शपथ ली। वे महाराष्ट्र के अमरावती के रहने वाले हैं। जस्टिस गवई के सम्मान में बुधवार को अमरावती में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां उन्होंने ये बात कही।
'संसद के पास संशोधन करने का अधिकार'
सीजेआई बीआर गवई ने कहा, 'संविधान सर्वोपरि है,न कि संसद। भारत के संविधान के अधीन ही लोकतंत्र के तीनों अंग काम करते हैं। चीफ जस्टिस गवई ने कहा, संसद के पास संशोधन करने का अधिकार है, लेकिन संविधान के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा, इस विषय पर हमेशा से चर्चा होती आई है कि लोकतंत्र का सर्वोच्च अंग कौन है कार्यपालिका, विधायिका या न्यायपालिका?
जस्टिस गवई ने कहा, कुछ लोगों का मानना है कि संसद सर्वोपरि है, लेकिन मेरा मानना है कि संविधान सर्वोच्च है ,न कि संसद। संविधान के अधीन ही लोकतंत्र के तीनों अंग काम करते हैं।
सीजेआई ने कहा कि हम न्यायाधीशों का मूल कर्तव्य है सभी नागरिकों के संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों की रक्षा करें। इस दौरान जस्टिस गवई ने बुलडोजर कार्रवाई पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, आश्रय का अधिकार सर्वोच्च है। किसी का आश्रय छीनना गलत है।
बचपन और पिता का किया जिक्र
बीआर गवई ने बचपन को याद करते हुए कहा कि वे आर्किटेक्ट बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे। क्योंकि वे भी वकील बनना चाहते थे, लेकिन बन नहीं पाए। उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया था।

