लापता कैप्टन आशीष कुमार के मामले में ट्विस्ट: सरकार का दावा- मौत हो चुकी; पत्नी की SC में याचिका- मेरे पति जिंदा हैं
Published:
4 min read

इंटरनेशनल डेस्क। होर्मूज स्ट्रेट के पास मार्च में ड्रोन हमले में भारतीय मर्चेंट नेवी कैप्टन आशीष कुमार (Ashish Kumar) की कथित मौत के मामले में एक नया ट्विस्ट आ गया है। कैप्टन की पत्नी अंशु ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर दावा किया है कि उसे पति जिंदा हैं। उन्हें किसी विदेशी ग्रुप ने अगवा कर लिया है। पिटीशन में कहा गया है कि उन्हें इंटरनेशनल नंबर से फिरौती की कॉल भी आई थी। अगवा करने वालों ने कैप्टन को छोड़ने के बदले 20 लाख रुपए मांगे हैं।
बिहार के रहने वाले हैं कैप्टन आशीष
आशीष कुमार बिहार के बेतिया के रहने वाले हैं। 1 मार्च 2026 को ओमान के खासाब पोर्ट के पास खड़े ऑयल टैंकर स्काई लाइट (Sky Light) पर मिसाइल और ड्रोन अटैक हुआ था। उस समय जहाज पर 10 भारतीय नाविक मौजूद थे। इंडियन एम्बेसी के मुताबिक हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी। ओमान के अफसरों ने 8 भारतीय नाविकों को बचा लिया था, लेकिन कैप्टन आशीष कुमार और क्रू मेंबर दलीप, जो इंजन रूम में मौजूद थे, लापता हो गए थे।

कैप्टन के कमरे से जला कंकाल मिला था
4 मार्च को ओमान कोस्ट गार्ड ने कैप्टन के कमरे से जला हुआ कंकाल और कुछ हड्डियां मिलने की जानकारी दी थी। उस समय इंडियन एम्बेसी ने कहा था कि कैप्टन के कमरे में कोई नहीं गया था और जो अवशेष मिले हैं, वे कैप्टन आशीष कुमार के हो सकते हैं। इसके बाद मान लिया गया था कि हमले में कैप्टन अशीष की मौत हो चुकी है। हालांकि, परिवार शुरू से ही इस बात पर यकीन करने के लिए तैयार नहीं था।
DNA में पता चला- जली हड्डियां इंसान की नहीं
अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में परिवार ने दावा किया है कि फॉरेंसिक और DNA जांच में यह पता चला है कि बरामद अवशेष आशीष कुमार के नहीं थे। याचिका के मुताबिक 15 मई 2026 को मस्कट स्थित इंडियन एम्बेसी ने परिवार को बताया कि मिले हुए अवशेष कैप्टन आशीष कुमार के नहीं हैं। वहीं रॉयल ओमान पुलिस की डायरेक्टर जनरल ऑफ सर्च एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन की बायोलॉजिकल टेक्निकल एग्जामिनेशन रिपोर्ट में भी जांचे गए हड्डियों के टुकड़ों से किसी इंसान का DNA नहीं मिला है।

पत्नी ने इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का जिक्र किया
पत्नी अंशु ने अपनी याचिका में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक जिस दिन जहाज पर हमला हुआ, उसी दिन उन्होंने कैप्टन के दूसरे मोबाइल नंबर पर WhatsApp मैसेज भेजा था। यह मैसेज हमले के तीन घंटे बाद भी डिलीवर हुआ। याचिका में दावा किया गया है कि अगर फोन एक्टिव था, तो इससे यह पता लगता है कि कैप्टन या उनका मोबाइल डिवाइस हमले के बाद भी सेफ था।
अगवा करने वालों ने 20 लाख रुपए फिरौती मांगी
याचिका में यह भी कहा गया है कि 4 मार्च को अंशु को इंटरनेशनल और भारतीय नंबरों से कई कॉल आईं। कॉल करने वालों ने दावा किया कि कैप्टन आशीष कुमार जिंदा हैं और उनकी हिरासत में हैं। उन्हें छोड़ने के बदले 20 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। परिवार का कहना है कि इन कॉल्स को भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे यह संभावना मजबूत होती है कि कैप्टन की मौत नहीं हुई थी।

पत्नी की सुप्रीम कोर्ट से पति को वापस लाने की गुहार
पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि फॉरेन मिनिस्ट्री और होम मिनिस्ट्री को निर्देश दिए जाएं कि वे सभी मौजूद डिप्लोमैटिक, कॉन्सुलर और इंटेलिजेंस चैनलों का इस्तेमाल कर कैप्टन आशीष कुमार का पता लगाएं। उन्हें सुरक्षित बरामद करें और कोर्ट के सामने पेश करें। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी, क्योंकि अगर याचिका में किए गए दावों की पुष्टि होती है तो होर्मूज हमले से जुड़ी पूरी कहानी नया मोड़ ले सकती है।

