नंदीग्राम में BJP उम्मीदवार के हलफनामे के खिलाफ याचिका खारिज: कांग्रेस ने उम्र गड़बड़ लिखने का आरोप लगाया था; EC ने क्या दलील दी
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भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं। उन्होंने 15 सितंबर को पूर्व मेदिनीपुर के हल्दिया में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट के उपचुनाव से पहले BJP उम्मीदवार हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर उठे सवाल पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कांग्रेस को राहत नहीं दी। कोर्ट ने रथ के हलफनामे में उम्र को लेकर गड़बड़ी की जांच की मांग वाली प्रदेश कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस कृष्ण राव ने मंगलवार (29 सितंबर) को कोर्ट में कहा कि प्रदेश कांग्रेस की याचिका खारिज की जाती है।
कांग्रेस ने उम्र को लेकर क्या सवाल उठाया था
कांग्रेस का दावा था कि BJP उम्मीदवार हसीरानी रथ ने अपने चुनावी हलफनामे में उम्र 60 साल से ज्यादा बताई है। वहीं, उन्होंने 10वीं कक्षा पास करने का साल 1965 बताया है। यानी उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा होनी चाहिए।
कांग्रेस ने कहा कि दोनों जानकारियों को साथ देखने पर उनकी उम्र को लेकर सवाल खड़ा होता है। पार्टी ने यह भी पूछा कि क्या चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्रों और हलफनामे की सही तरह से जांच की थी। कांग्रेस की ओर से वकील रित्जू घोषाल ने कोर्ट से BJP उम्मीदवार की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की थी।
चुनाव आयोग ने कहा- अब आपत्ति का वक्त निकल गया
चुनाव आयोग की ओर से वकील जिष्णु चौधरी ने दलील दी कि नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच 17 सितंबर को हो चुकी है। ऐसे में अब वक्त गुजर जाने के बाद आपत्ति नहीं उठाई जा सकती।
आयोग ने यह भी कहा कि हलफनामे में गलत जानकारी होना उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने का आधार नहीं है। सीनियर एडवोकेट डीएस नायडू ने भी कहा कि उम्र को लेकर उठाया गया सवाल ऐसा बड़ी गलती नहीं है, जिसके आधार पर हसीरानी रथ की उम्मीदवारी रद्द की जाए। उन्होंने दलील दी कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा तय नहीं है।

अपने उम्मीदवार की जमानत के लिए भी हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस
बंगाल कांग्रेस ने नंदीग्राम उपचुनाव में अपने उम्मीदवार मिलन प्रधान की जमानत के लिए भी कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। मिलन प्रधान को 18 सितंबर को 2007 के एक मर्डर केस में गिरफ्तार किया गया था।
उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में उन्हें समर्थन देने की बात कही थी। ममता ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया था।
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