सीपी राधाकृष्णन 15वें उपराष्ट्रपति बने, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई: राहुल गांधी समारोह में नहीं दिखे, PM मोदी समेत NDA के बड़े नेता मौजूद रहे
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सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में देश के 15 वें उप राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
नेशनल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को सीपी राधाकृष्णन को देश के 15 वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। इस मौके पर PM नरेंद्र मोदी, पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत NDA के बड़े नेता मौजूद रहे। हालांकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इस समारोह में मौजूद नहीं रहे।

उपराष्ट्रपति चुनाव में मिले थे 452 वोट
NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने 9 सितंबर को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की। उन्हें 452 वोट मिले। जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले। हालांकि, राधाकृष्णन वोट के लिहाज से पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए। धनखड़ को 74.4 प्रतिशत वोट मिले थे।
मानसून सत्र में पूर्व उपराष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया था
मानसून सत्र में जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। इसके बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया था। जबकि विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस सुदर्शन रेड्डी को उनके खिलाफ उतारा था। सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, ऐसे में उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाने के पीछे BJP की सधी हुई रणनीति मानी जा रही है।
तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि BJP राधाकृष्णन के सहारे राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। BJP ओडिशा की तरह ही तमिलनाडु में भी इसी रणनीति के तहत सफलता पाना चाह रही है।
मां ने सर्वपल्ली राधाकृष्णन से प्रेरित होकर रखा था नाम
अगर वे चुने जाते हैं तो सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बाद इसी सरनेम के दूसरे उपराष्ट्रपति होंगे। इंटेरस्टिंग फैक्ट ये भी है कि सीपी राधाकृष्णन का नाम उनकी मां ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से इंस्पायर होकर ही रखा था।
उपराष्ट्रपति चुनाव में 3 बड़ी जीत
⦁ उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत केआर नारायणन के नाम दर्ज है। 1992 में उनके सामने निर्दलीय काका जोगिंदर सिंह उतरे थे। 790 सांसदों में 711 ने वोट डाला था। इनमें से 10 वोट अमान्य घोषित हो गए। जोगिंदर को सिर्फ 1 वोट मिला, जबकि केआर नारायणन को 700 वोट मिले।
⦁ दूसरी बड़ी जीत निर्दलीय उम्मीदवार जाकिर हुसैन के नाम है। 1962 के चुनाव में जाकिर हुसैन को 97.59 फीसदी यानी 568 वोट मिले, जबकि सामंतसिंहार को मात्र 14 वोट मिले।
⦁ 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ को 74.37% यानी 528 वोट मिले। जबकि उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे विपक्ष के उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 25.63% यानी 182 वोट मिले थे।

