BRICS समिट के लिए झुग्गियों पर पर्दा!: पवन खेड़ा बोले- BJP को हर 'हिजाब' बुरा नहीं लगता, नाकामी ढकने वाला पसंद है
Published:
3 min read

दिल्ली में 18वां BRICS समिट चल रही है। इस दौरान कुछ प्रमुख रास्तों के किनारे बनी झुग्गियों और गरीब बस्तियों को बड़े पर्दों और अस्थायी बैरिकेड्स से ढका गया है। कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
नेशनल डेस्क। दिल्ली में 18वें BRICS समिट से पहले राजधानी की सड़कों पर लगाए गए बड़े-बड़े पर्दों और बैरिकेड्स को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि विदेशी मेहमानों को देश की गरीबी और झुग्गियों की हकीकत दिखने से रोकने के लिए इन इलाकों को ढका गया है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका वीडियो शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा- BJP को हर तरह का 'हिजाब' यानी पर्दा बुरा नहीं लगता। ऐसा पर्दा जो मोदी सरकार की नाकामियों को ढक दे, वह उसे पसंद है। हालांकि, सरकार की ओर से इन पर्दों को लेकर अब तक कोई ऑफिशियल कारण नहीं बताया गया है।

BRICS मेहमानों के रास्ते में झुग्गियां, इसलिए लगाए गए पर्दे!
दिल्ली में 18वां BRICS समिट चल रहा है। भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। समिट में कई देशों के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में राजधानी के एयरपोर्ट, होटल और कार्यक्रम स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों पर खास तैयारियां की गई हैं।
इन्हीं रास्तों के आसपास मौजूद झुग्गी बस्तियों और कम आय वाले इलाकों को बड़े पर्दों और अस्थायी बैरिकेड्स से ढका गया है। कांग्रेस ने इसी व्यवस्था को मुद्दा बनाकर सरकार पर हमला बोला है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को देश की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को छिपाने के बजाय उनका समाधान करना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि विदेशी मेहमानों के सामने भारत की एक खास तस्वीर पेश करने के लिए गरीब बस्तियों को पर्दे के पीछे कर दिया गया।

मनीष तिवारी बोले- BRICS जैसे मंचों की बातचीत ज्यादा जरूरी
इसी बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने BRICS समिट को लेकर कहा कि आज दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उनके मुताबिक, सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद बना पुराना ग्लोबल सिस्टम काफी हद तक टूट चुका है, जबकि उसकी जगह कोई नया सिस्टम अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है।
तिवारी ने कहा कि ऐसे वक्त में BRICS, ASEAN, Quad और SCO जैसे मंचों पर देशों के बीच बातचीत जारी रहना ज्यादा जरूरी है। उनके मुताबिक, सिर्फ बैठकों से क्या नतीजा निकला, इस पर ध्यान देने के बजाय यह देखना चाहिए कि देश एक-दूसरे से बातचीत कर रहे हैं और आगे का रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत और आपसी कॉन्टैक्ट के जरिए ही एक ऐसा नया ग्लोबल सिस्टम तैयार हो सकता है, जिसमें अलग-अलग देश साथ काम कर सकें।
यह भी पढ़ें...

