मालेगांव ब्लास्ट केस के गवाह का दावा: CM योगी, इंद्रेश कुमार समेत RSS के 5 नेताओं का नाम लेने का दबाव डाला गया, ATS ने 1 हफ्ते हिरासत में रखा
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मालेगांव ब्लास्ट केस में गवाह मिलिंद जोशी ने सुनवाई के दौरान दिए बयान में दावा किया कि उनपर योगी समेत RSS के 5 नेताओं का नाम लेने का दबाव डाला गया। (फाइल फोटो)
मालेगांव ब्लास्ट केस में गवाह रहे मिलिंद जोशी ने बड़ा दावा किया है। मिलिंद जोशी का दावा है कि उन्हें महाराष्ट्र एटीएस ने अवैध तरीके से एक हफ्ते तक हिरासत में रखा था और उन पर योगी आदित्यनाथ समेत RSS से जुड़े 5 लोगों का नाम लेने का दबाव डाला गया था। मिलिंद जोशी केस में गवाह थे, लेकिन बाद में वे अपने बयान से पलट गए, उनके बयान का NIA कोर्ट के फैसले में भी जिक्र है। कोर्ट ने गुरुवार को मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया था।
29 सितम्बर 2008 को मालेगांव बम ब्लास्ट से 6 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले की जांच पहले महाराष्ट्र ATS ने की थी, इसके बाद इसकी जांच NIA को सौंपी गई।
CM योगी समेत 5 लोगों को फंसाने की थी साजिश
NIA कोर्ट के जज ए के लाहोटी ने 1,000 से ज्यादा पन्नों के फैसले में मिलिंद जोशी राव की गवाही का जिक्र किया है। फैसले के मुताबिक, महाराष्ट्र ATS के अधिकारियों ने मालेगांव ब्लास्ट मामले में गवाह मिलिंद जोशी पर दबाव डाला था कि वे योगी आदित्यनाथ, RSS नेता इंद्रेश कुमार, BJP की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, हिंदू संत और RSS के पूर्व सदस्य स्वामी असीमानंद और प्रोफेसर देवधर का गलत नाम लें।
जज लाहोटी ने अपने फैसले में लिखा, राव ने बताया कि महाराष्ट्र ATS की टीम ने उसे गैरकानूनी तरीके से एक हफ्ते तक हिरासत में रखा था और कहा था कि उन्हें तभी रिहा किया जाएगा, जब वे इन पांच लोगों के नाम लेंगे।
'जांच को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश की गई'
इससे पहले ATS के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने भी मालेगांव ब्लास्ट केस में हुई जांच को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि ATS के सीनियर अधिकारियों ने उन्हें RSS प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था। महबूब मुजावर ब्लास्ट मामले की जांच करने वाली ATS टीम के सदस्य थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश की गई और इस पर आपत्ती जताने पर उनके खिलाफ झूठे मुकदमें दर्ज किए गए। मुजावर ने कहा कि, इसे भगवा आतंकवाद का मामला बनाने के लिए मोहन भागवत को शामिल किया जा रहा था।
उधर, BJP इस मामले में पहले से ही आरोप लगा रही है कि इस पूरे मामले में दक्षिणपंथी नेताओं को फंसाने और हिंदू समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।
37 लोग बयान से मुकर गए- जज ए के लाहोटी
29 सितंबर 2008 को रमजान के महीने में मालेगांव बम ब्लास्ट हुआ था। NIA ने दावा किया था कि आरोपियों का इरादा मुस्लिम समुदाय में दहशत फैलाना था। इस मामले में 323 गवाह पेश किए थे, इनमें से 37 लोग अपने बयान से मुकर गए।
NIA कोर्ट ने गुरुवार को मालेगांव मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत सभी सात लोगों को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा- अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि बम ब्लास्ट हुआ था, लेकिन बम बाइक पर लगे होने के सबूत नहीं पेश कर पाए।

