फ्रीडम ऑफ स्पीच का गलत इस्तेमाल फैशन बन गया: महिला टीचर ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान PM मोदी-सेना के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट की; HC ने FIR रद्द करने से किया इनकार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला टीचर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुणे की महिला टीचर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेना के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करने पर दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई थी। 46 साल की टीचर पर पुणे के कालेपदल थाने में 15 मई को FIR दर्ज की गई थी। कोर्ट ने कहा, कुछ लोगों में फ्रीडम ऑफ स्पीच का सोशल मीडिया पर गलत इस्तेमाल फैशन बन गया है।
पोस्ट से नफरत पैदा हुई- हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस अजय एस गडकरी और जस्टिस राजेश एस पाटिल की बेंच ने कहा, महिला शिक्षिका की पोस्ट से नफरत पैदा की गई। उनका पोस्ट साफतौर पर अपराध करने के इरादे को दर्शाता है। इसकी मुख्य रुप से जांच होनी चाहिए।
टीचर की मानसिक स्थिती ठीक नहीं थी- वकील
सुनवाई के दौरान यचिकाकर्ता के वकील हर्षल साठे ने दावा किया, ग्रुप पर पोस्ट करने के दौरान उनकी मानसिक स्थिती ठीक नहीं थी। उन्होंने अन्य लोगों की प्रतिक्रिया के बाद अपनी पोस्ट को डिलीट कर दिया और शिकायतकर्ता से माफी भी मांगी थी। साठे ने कहा, टीचर को पहले ही बहुत नुकसान हो चुका है, उसे स्कूल से निकाल दिया गया। उन्होंने मांग की, बिना किसी आधार के दर्ज की गई FIR को खारिज किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 जुलाई को दिए गए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के खिलाफ भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सोशल मीडिया का मिस्यूज, अभिव्यक्ति की आजादी का उठा रहे फायदा
कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हैं और उच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाना फैशन बन गया है, ये ऐसी पोस्ट करते हैं, जिनसे लोगों में नफरत और सांप्रदायिकता पैदा होती है।
क्या है मामला?
महिला शिक्षिका पर प्रधानमंत्री और देश के खिलाफ पोस्ट करने का आरोप है। शिकायतकर्ता और महिला शिक्षिका दोनों एक ही हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं। वे दोनों उस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे, जिसमें लगभग 380 लोग जुड़े थे। शिकायतकर्ता ने महिला शिक्षिका पर आरोप लगाया कि 7 मई को व्हाट्सएप ग्रुप पर कुछ सदस्यों ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए भारतीय सेना की प्रशंसा की। उधर, याचिकाकर्ता (महिला शिक्षिका) ने उस प्रशंसा का जबाव देते हुए कहा कि इस ग्रुप का इस्तेमाल नेशनल समाचार चैनल के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। एक अन्य सदस्य ने जवाब देते हुए कहा- यह देश के प्रति एकजुटता दिखाने का समय है। इसके बाद महिला शिक्षिका ने मजाक उड़ते हुए एक हंसने वाली इमोजी पोस्ट की थी। इसके बाद महिला ने पीएम मोदी और देश के खिलाफ एक पोस्ट लिखी। इसी के आधार पर उसपर FIR दर्ज की गई।
कई धाराओं में FIR दर्ज
महिला शिक्षिका के खिलाफ पुणे के कालेपदल थाने में 15 मई को BNS की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने के मामले में), 196 (धर्म, जाति के आधार पर विभिन्न ग्रुप के बीच नफरत पैदा करना), 197, 352 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर टिप्पणी करना) और 353 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

